Jind Jail Threat Case: जेल से धमकी देने के मामले अक्सर उजागर होते रहते हैं और इन मामलों में पुलिस कभी-कभी कोई कार्रवाई भी करती है। जेल से धमकी देने के मामले कोई नई नहीं है। यहां तक की लॉरेंस बिश्नोई का जेल से इंटरव्यू भी वायरल हुआ था। अभी पिछले दिनों जींद जेल से धमकी दिए जाने का मामला चर्चा में आया था। इस मामले में डीजी जेल आलोक राय ने साफ कहा कि यह धमकी जींद जेल से नहीं दी गई।
असल में जेल से धमकी दिए जाने के मामले कोई नए नहीं हैं। जींद जेल से कई बार मोबाइल भी बरामद हो चुके हैं। जब जब जिम जेल से मोबाइल बरामद हुए तब तक पुलिस ने प्रिजनर एक्ट के अंतर्गत मामले दर्ज किए हैं। लेकिन असल कहानी यह है कि जेल में हवालातियों और कैदियों के अधिकारों की रक्षा को ध्यान में रखते हुए परिजन इनमेट्स कॉलिंग सिस्टम स्थापित किया गया है। इसके लिए एक सर्विस प्रोवाइडर कंपनी को ठेका दिया जाता है। वर्तमान में 2022 में इनवेडर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को यह ठेका दिया गया था। हरियाणा के जेल विभाग और ठेका हासिल करने वाली कंपनी के बीच एक समझौता पत्र भी हस्ताक्षर किया गया है जिसमें कुल मिलाकर 29 क्लाज हैं।
इस समझौते के नियम दो में साफ लिखा है कि सर्विस प्रोवाइडर हर काल की रिकॉर्डिंग करेगी और उसे 2 महीने के लिए संभाल कर रखेगा। नियम तीन में कहा गया है कि पुरुष कैदी के मामले में 10 मिनट और महिला कैदी के मामले में 15 मिनट के बाद फोन अपने आप कट जाएगा। इस मामले में नियम नंबर 26 में कहा गया है कि सर्विस प्रोवाइडर इस प्रकार का सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करेगा जिसमें कॉल कांफ्रेंस कॉल फॉरवर्डिंग और कॉल डायवर्टिंग करने पर कॉल अपने आप कट जाएगी।

बताया जाता है कि जेल में इन तीनों ही नियमों की पालना नहीं हो रही है। इस प्रकार का सॉफ्टवेयर सर्विस प्रोवाइडर कंपनी ने इंस्टॉल नहीं किया है जिससे कि कॉल फॉरवर्ड होने, कॉल डायवर्ट होने या कॉल कांफ्रेंस होने पर वह कट जाए।
बताते हैं कि पहले जेल में जैमर लगाने की बात की गई थी लेकिन ऐसा होने पर जेल के अधिकारियों के फोन भी बंद हो जाते। ऐसे में सरकार ने यह नियम नंबर 26 डाला था लेकिन सर्विस प्रोवाइडर ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। जिसका लाभ गैंगस्टर जेल से धमकी देकर उठा रहे हैं।
हरियाणा में भी जींद में जेल से धमकी देने का मामला नया नहीं है। इससे पहले भी इस प्रकार के मामले सामने आए हैं। हरियाणा भर में इस प्रकार के मामलों की संख्या काफी ज्यादा है। 2 फरवरी 2022 को यह लिखित समझौता हुआ था और यह 5 साल के लिए है ऐसे में अभी करीब डेढ़ साल का समय इसका बाकी है।
जींद के एक मामले में जेल से धमकी दिए जाने का आरोप लगने के बाद डीजी आलोक राय ने भले ही साफ कर दिया हो कि ऐसा कोई मामला नहीं है और जेल से धमकी नहीं दी गई है लेकिन इसके बावजूद यह कहना बहुत मुश्किल है की जेल से धमकी दिया जाना संभव ही नहीं है।
जेल से धमकी दिए जाने की खबरों के बीच जब तिहाड़ जेल से लॉरेंस बिश्नोई का इंटरव्यू वायरल हुआ तब भी सरकार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि यह इंटरव्यू जेल से नहीं हुआ है। असल में जेल की सुरक्षा का मामला काफी संगीन है और विडंबना इस बात की है कि सरकार अपने ही द्वारा बनाए गए नियमों की पालना एक ठेकेदार से नहीं करवा पा रही है। जबकि नियमों में साफ है कि इसमें सरकार को कुछ नहीं करना है और जो भी उपकरण स्थापित किए जाएंगे उसका सारा खर्चा सर्विस प्रोवाइडर कंपनी को ही वहन करना होगा।
सरकार ने जेल में कैदियों और हवालातियों को फोन की सुविधा इसलिए दी थी ताकि वह अपने घर बात करके या अपने वकील से बात करके अपने केस की पैरवी ठीक से करवा सकें। इसके पीछे एक कारण यह भी था कि कैदी और हवालाती जेल में रहते हुए डिप्रेशन का शिकार ना हो और घर बात होने से वह अपने आपको काफी हद तक रिलीफ में महसूस करें। लेकिन इस बात का फायदा गैंगस्टर और बड़े अपराधियों ने जेल से धमकी देने और जेल में बैठकर ही फिरौती मांगने के रूप में शुरू कर दिया।