चीनी के बाद चावल, दाल, प्याज, रिफाइंड और सरसों के तेल भी हुए महंगे
मंगलवार से दूध भी ₹100 होने की आशंका
सत्य खबर हरियाणा
Effect of inflation : आम आदमी की थाली से राहत गायब होती दिख रही है. चीनी की बढ़ती कीमतों के झटके से उपभोक्ता अभी उबर भी नहीं पाए थे कि अब चावल, दूध और दालों के दामों में अचानक 15 प्रतिशत (लगभग 15 से 20 रुपये प्रति किलो) तक का उछाल दर्ज किया गया है। सबसे अधिक तेजी प्रीमियम बासमती चावल में देखी जा रही है, जो कुछ दिनों पहले 85 से 90 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, अब वो 100 से 110 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। साधारण और परमल चावल की किस्मों में भी प्रति क्विंटल 100 से 500 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है।

अब हरियाणा में भी दूध के दाम बढ़ सकते हैं। चार जिलों के कुछ गांवों में पशुपालकों ने एक सितंबर से भैंस का दूध 100 रुपए प्रति लीटर और कुछ जगह गाय का दूध 80 रुपए प्रति लीटर बेचने का फैसला लिया है। फिलहाल भैंस का दूध 70 से 80 रुपए और गाय का दूध 50 से 60 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है।दूध के रेट बढ़ाने की मुहिम की शुरुआत हिसार के राजथल गांव से हुई। यहां पशुपालकों ने भैंस का दूध 100 रुपए प्रति लीटर, गाय का दूध 80 रुपए प्रति लीटर और देसी घी 1500 से 2000 रुपए प्रति किलो करने का फैसला लिया। इसके बाद हांसी, कुरुक्षेत्र, कैथल और जींद के गांवों में भी पशुपालकों ने बैठकें कर इसी तरह के फैसले लिए।
डेयरी फार्मर्स एसोसिएशन ने भी वीटा के अलग-अलग प्लांटों में ज्ञापन सौंपकर दूध के दाम 2 से 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ाने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि पशु आहार, तूड़ी और अन्य जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से पशुपालकों की लागत लगातार बढ़ रही है। तेल महंगा होने से दूध की ढुलाई का खर्च भी बढ़ गया है।
थोक दूध महंगा होने का सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा। दूध महंगा होने से दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। त्योहारी सीजन में दूध की बड़ी खपत होने के कारण मिठाई की दुकानों, बेकरी और खाने-पीने की दुकानों पर भी लागत बढ़ेगी। ऐसे में त्योहारों के दौरान मिठाइयों और दूसरे दूध से बने उत्पादों के दाम बढ़ने की संभावना है।
बीते तीन हफ्तों के भीतर खुदरा बाजार में चीनी के दामों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके साथ ही गुड़, खांड, सरसों तेल, घी और रिफाइंड के भावों में भी भारी उछाल आया है, जिससे आम उपभोक्ताओं का मासिक बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।
सरसों का तेल ₹160 से बढ़कर ₹190 प्रति लीटर पहुंच गया है। खाद्य तेल कंपनियों ने सीधे दाम बढ़ाने के बजाय उत्पादों की पैकिंग घटा दी है। पहले 1 लीटर में आने वाले पैकेट अब 800ml और 600ml की पैकिंग में बेचे जा रहे हैं।
पहले से परेशान आम आदमी की परेशानी प्याज के बढ़ते दामों ने और बढ़ा दी है। प्याज का भाव भी 50 रुपये किलो के पार पहुंच गया है। ऐसे में गृहणियों को घर का बजट संभालने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों के सामान के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। त्योहारों पर मिठाई और घर में पकवान बनाना भी अब पहले के मुकाबले महंगा हो गया है। लोगों की मांग है कि सरकार महंगाई पर लगाम लगाए और चीनी समेत जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए। लोगों का यह भी कहना है कि चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ गन्ने से एथेनॉल उत्पादन और चीनी के उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि बाजार में चीनी की कमी न हो।
कीमतों में उछाल के कारण
बाजार के जानकारों और उपभोक्ताओं का मानना है कि अल नीनो के प्रभाव से कमजोर पड़े मॉनसून की आशंकाओं ने बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है। इसके अलावा देश भर में गन्ने का बड़े पैमाने पर उपयोग इथेनॉल बनाने के लिए किए जाने की चर्चाओं से भी चीनी के स्टॉक में कमी का भ्रम फैला है, जिससे सट्टेबाजी को बढ़ावा मिला है।
एक तरफ जहां बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं देश में चीनी का उत्पादन खपत से अधिक है। आंकड़े बताते हैं कि देश की वार्षिक घरेलू खपत लगभग 2.83 करोड़ टन है, जबकि इस सीजन में कुल उत्पादन 3.11 करोड़ टन रहने का अनुमान है। करनाल सहकारी चीनी मिल की प्रबंधक अदिति शर्मा ने बताया कि पिराई सत्र 2025-26 में मिल ने 38.82 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई कर 3.71 लाख क्विंटल रिफाइंड चीनी का उत्पादन किया है। हमारी तकनीकी दक्षता 93.57% और रिकवरी 9.55% रही है। बाजार में चीनी की कोई कमी नहीं है। दरें तय करना ट्रेडर्स का काम है।
वैश्विक मांग और बढ़ता निर्यात
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चावल निर्यात करने वाले व्यापारी सचिन बंसल का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय युद्ध और सप्लाई चेन में आए व्यवधान के कारण विदेशों में भारतीय चावल की मांग तेजी से बढ़ी है। निर्यातकों द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक सप्लाई भेजने से घरेलू स्तर पर स्टॉक की कमी महसूस की जा रही है।
त्योहारी सीजन और जमाखोरी
आगामी त्योहारों को देखते हुए बाजार में मांग बढ़ी है। वहीं, खुदरा व्यापारियों का आरोप है कि कुछ बड़े कारोबारियों द्वारा की जा रही कालाबाजारी और कृत्रिम जमाखोरी भी कीमतों को हवा दे रही है।
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