पलवल के सरकारी अस्पताल में सांप काटे का ईलाज झाड़-फूंक से

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एमरजेंसी में झाड़ा लगाते नजर आया एक व्यक्ति

सत्य खबर हरियाणा

Exorcism in Government Hospital : सरकारी अस्पताल में अगर झाड़-फूंक होने लगे तो आप क्या कहेंगे?

यूं तो सरकार द्वारा मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं। लेकिन पलवल से सामने आई एक तस्वीर ने इन दावों के बीच एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन से मांगा जाना चाहिए। इस सवाल के जवाब में अस्पताल प्रशासन बचाव की मुद्रा में है।

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मामला सांप के काटने से जुड़ा बताया जा रहा है। सामने आई तस्वीर में एक युवती अस्पताल परिसर में फर्श पर बैठी दिखाई दे रही है और उसके साथ कथित तौर पर झाड़-फूंक की जा रही है। तस्वीर को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, तस्वीर में दिखाई दे रही घटना की पूरी परिस्थितियों और यह स्पष्ट नहीं है कि झाड़-फूंक किसने और किस अनुमति से की, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना बेहद जरूरी है।

अगर अस्पताल में इलाज था तो झाड़-फूंक क्यों?

सर्पदंश को हल्के में लेना जानलेवा हो सकता है। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की मानक उपचार गाइडलाइन में सांप के काटने के मामलों के लिए चिकित्सकीय प्रबंधन और एंटी-स्नेक वेनम संबंधी प्रोटोकॉल दिए गए हैं। राष्ट्रीय स्तर की योजना में भी सर्पदंश के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचाने, चिकित्सकीय जांच और जरूरत पड़ने पर एंटीवेनम उपचार को महत्वपूर्ण बताया गया है। ऐसे में पलवल की इस तस्वीर को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर मरीज अस्पताल पहुंच चुकी थी, तो उसके इलाज के साथ झाड़-फूंक जैसी गतिविधि अस्पताल परिसर में क्यों दिखाई दी?

क्या पलवल अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध है?

इस सवाल का एक महत्वपूर्ण संदर्भ भी सामने आता है। जून 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में जिला नागरिक अस्पताल, पलवल के एसएमओ के हवाले से कहा गया था कि अस्पताल में सर्पदंश के मरीजों के इलाज की व्यवस्था और आवश्यक एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन तथा दवाइयां उपलब्ध थीं। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी पलवल के सिविल अस्पताल को न्यू सोहना रोड, आगरा चौक के पास स्थित जिला अस्पताल के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

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यही वजह है कि अब सामने आई तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। क्या उस समय भी एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध था? मरीज की चिकित्सकीय जांच हुई थी या नहीं? उसे कौन-सा उपचार दिया गया? और अस्पताल परिसर में झाड़-फूंक की अनुमति किसने दी?

तस्वीर ने स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर बढ़ाई चर्चा

स्थानीय स्तर पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मरीजों की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं। कहीं दवाइयों को लेकर सवाल उठते हैं तो कहीं इलाज में देरी या मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किए जाने की बातें सामने आती हैं। लेकिन सर्पदंश का मामला सामान्य बीमारी से अलग है। इसमें समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन और आवश्यकता पड़ने पर एंटीवेनम उपचार महत्वपूर्ण माना जाता है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय सर्पदंश कार्ययोजना भी जिला अस्पतालों और सीएचसी में आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने तथा एंटीवेनम की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर देती है।

क्या कहा अस्पताल प्रशासन ने

इस बीच अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि इस मामले में मरीज को एंटी वेनम इंजेक्शन दिया गया था। उनका कहना है कि झाड़-फूंक करने वाले व्यक्ति को मरीज के परिजन लेकर आए थे और जब उन्हें पता चला तो उन्होंने उसे बाहर निकाल दिया गया था।

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