कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के लिए आसान नहीं होगा हरियाणा कांग्रेस से गुटबाजी को खत्म करना, खुलकर नजर आ रही गुटबाजी

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एक दूसरे पर जमकर चला रहे शब्दों के बाण, गोकुल सेतिया के निशाने पर बीरेंद्र-बृजेंद्र

सत्य खबर हरियाणा

Factionalism in Haryana Congress : हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी इन दिनों हरियाणा के दौरे पर हैं और इस दौरान वह प्रदेश कांग्रेस से गुटबाजी को खत्म करने और कांग्रेस के नेताओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करने का काम कर रहे हैं लेकिन हरियाणा कांग्रेस के नेता उनके सामने एक दूसरे पर इस प्रकार से तंज करने का काम कर रहे हैं कि हरियाणा कांग्रेस की गुटबाजी सड़क पर साफ दिखाई देने लगी है। बात करें हरियाणा में कांग्रेस की गुटबाजी की तो फिलहाल मुख्य तौर पर एक अच्छा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थकों का है तो दूसरा अच्छा उनके विरोधियों का है। कुमारी शैलजा, रणदीप सिंह सुरजेवाला, बीरेंद्र सिंह, कैप्टन अजय यादव आदि तमाम नेता गाहे-बगाहे एक दूसरे का साथ देते हुए नजर आते हैं।

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सिरसा के विधायक गोकुल सेतिया के निशाने पर बीरेंद्र सिंह और उनके पुत्र बृजेंद्र सिंह रहते हैं। जब बृजेंद्र सिंह प्रदेश में सद्भावना यात्रा निकाल रहे थे उसे समय भी गोकुल सेतिया ने उन पर निशाना साधा था और आज भी वह उन पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं।

गोकुल सेतिया ने कल रात अपने फेसबुक पेज पर लिखा, बीजेपी की मलाई चाटकर कल हमारी कांग्रेस की मंजी ठोकने वाले 2 साथी टाइम से आकर सबसे अगली लाइन में बैठ गए। जब स्टेज और हॉल पूरी तरह ख़ाली था और लंबे-लंबे प्रवचन पेलने लगे। अब बिल्ली बताएगी हमें दूध की रखवाली कैसे करनी थी?
हमारे प्रधान जी ने मेरी और मेरे साथी देवेंद्र हंस (गुहला चीका विधायक) की पर्ची जानबूझकर आख़िरी लाइन में लगवाई और उन लोगों की एमएलए के आगे लगवाई जो पार्टी को तेल देने वाले थे।
गोकुल सेतिया ने आगे लिखा, हाँ मैंने पर्ची फाड़ी अपनी कुर्सी की भी और मेरे साथी एमएलए की कुर्सी की भी और आगे आकर ख़ुद भी बैठा और उन्हें भी बिठाया। साहब हम दब्बू नहीं हज़ारों लोगों का विश्वास जीतकर यहां तक आए हैं। कोई इस प्रकार से अपमानित करेगा तो ना आज बर्दाश्त करें ना कल। ना हमे किसी प्रकार का कोई लालच।

बता दें कि गोकुल सेतिया को भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नजदीकी माना जाता है और यह भी माना जाता है कि वह बीरेंद्र सिंह और उनके पुत्र बृजेंद्र सिंह पर राजनीतिक छिंटाकशी अपने राजनीतिक आका के इशारे पर करते हैं।

सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हमारे नेता इतने तोड़ दिए जाते हैं या ये कहें कि जोड़ दिए जाते हैं कि एक दूसरे को नमस्ते भी नहीं करते हैं। हमारे में गुटबाजी के बारे में मीडिया वाले भी पूछते हैं, लेकिन हम कहते हैं कि ग्रुप होते हैं और इसमें कड़वाहट में आ जाए तो दिक्कत होती है। हमें सत्ता में आना है और लोगों की भलाई करनी है। सैलजा ने हंसते हुए कहा कि हर बार नया प्रभारी आता है और उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और मिलकर काम करेंगे, लेकिन अगर यह कथनी में नहीं करनी में तबदील होगा तो बात बनेगी। इस पर टोकते हुए संजय दत्त ने कहा कि एक मौका दीजिए तो सैलजा बोली कि पार्टी ने मौका दिया है और राहुल जी का फैसला है।

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कांग्रेस की गुटबाजी की चर्चा केवल इतनी भर नहीं है। हरियाणा कांग्रेस के नए प्रभारी संजय दत्त के सामने रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि 60 साल के हरियाणा में कांग्रेस सिर्फ 3 बार अपने दम पर बहुमत ला पाई है। सुरजेवाला ने साफ कहा कि वोट प्रतिशत से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। यह बताओ 46 विधायक आए या नहीं। सीधे तौर पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर था। उन्होंने कहा कि 2005 के बाद हरियाणा में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला है। बता दें कि 2005 में भजनलाल के नेतृत्व में कांग्रेस को बहुमत मिला था और उसके बाद 2009 के चुनाव में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को निर्दलीय विधायकों के सहारे सरकार बनानी पड़ी थी। 2014 और 2019 तथा 2024 के चुनाव में कांग्रेस को लगातार तीन बार हार का सामना करना पड़ा है।

हरियाणा के पूर्व सीएम और वर्तमान में हरियाणा में प्रतिपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि रणदीप सुरजेवाला मेरा साथ दे दे और फिर देख धमाका। इसके जवाब में रणदीप सुरजेवाला भी चुप नहीं रहे। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि मेरे को 20 साल हो गए आपका साथ देते हुए। अब आपकी बारी आ गई है मेरा साथ देने की।

हालांकि कांग्रेस के नेता इन सभी बातों को हल्के-फुल्के अंदाज में चुहलबाजी के रूप में भी बताते हैं, लेकिन वास्तव में यह कांग्रेस की गुटबाजी का सार्वजनिक प्रदर्शन है।

जिस प्रकार से कांग्रेस के नए प्रदेश प्रभारी के सामने कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है, देखना यह होगा कि आने वाले समय में वह इस गुटबाजी को खत्म करने में किस हद तक सफल होते हैं। बता दें कि इससे पहले की सभी कांग्रेस प्रभारी हरियाणा में कांग्रेस की गुटबाजी को खत्म करने में विफल रहे हैं।

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