हरियाणा के बड़े चौराहों को ग्रीन चौराहे के रूप में किया जाएगा विकसित, वाहनों को पॉल्यूशन सर्टिफिकेट के बिना नहीं मिलेगा तेल
सत्य खबर हरियाणा
Now Green NCR : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण कम करने के लिए अब बड़े चौराहों को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाई जाएगी और ट्रैफिक जाम वाले स्थानों पर विशेष कार्ययोजना तैयार होगी। यह निर्णय शुक्रवार को गुरुग्राम में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया।

गुरुग्राम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए तैयार कार्ययोजना की विस्तार से समीक्षा की गई और संबंधित विभागों को सभी योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में हरियाणा के वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
बैठक में फैसला लिया गया कि गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत के प्रमुख चौक-चौराहों पर बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा। सड़कों की नियमित सफाई होगी, गड्ढों को भरकर वहां घास और पौधे लगाए जाएंगे, ताकि धूल कम उड़े और हवा की गुणवत्ता में सुधार हो।
बैठक में परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली (CAAQMS) के विस्तार, इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जिंग नेटवर्क को बढ़ावा देने, “नो पीयूसीसी-नो फ्यूल” व्यवस्था लागू करने, पुराने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई, निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) कचरा प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट निस्तारण तथा प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सख्ती से कार्रवाई करने पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तय समय सीमा में सभी योजनाएं लागू करने के निर्देश दिए और बताया कि राज्य सरकार जल्द ही नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) नीति कैबिनेट में लाने जा रही है।
बैठक में गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और बहादुरगढ़ सहित अन्य शहरों के ट्रैफिक जाम वाले स्थानों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जाम के कारणों का अध्ययन कर स्थायी समाधान निकाला जाए। जहां जरूरत हो, वहां सड़क चौड़ीकरण, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और सिग्नल व्यवस्था में सुधार किया जाए। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जाए। जिला प्रशासन, कृषि विभाग और जनप्रतिनिधि मिलकर किसानों को पराली निस्तारण के विकल्प और सरकारी योजनाओं की जानकारी दें। साथ ही तय लक्ष्यों की नियमित समीक्षा की जाए।
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