दुबई भागने की फिराक में थी डॉक्टर शाहीन, पुलिस को हुआ शक तो पाकिस्तान हैंडलर से टली मीटिंग NIA खोल रही डॉ. शाहीन के राज
दुबई भागने की फिराक में थी डॉक्टर शाहीन, पुलिस को हुआ शक तो पाकिस्तान हैंडलर से टली मीटिंग NIA खोल रही डॉ. शाहीन के राज

Satya Khabar,Panchkula
Wahid Collar Terror Module में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इस मामले की जांच मिलेगी सुरक्षा एजेंसी का दावा है कि इस मामले में गिरफ्तार आतंकी डॉक्टर शाहीन दुबई में जाकर पाकिस्तान हैंडलर से मिलने वाली थी। दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल में शामिल डॉ. शाहीन से जांच एजेंसियां पूछताछ कर हर कड़ी को एक-दूसरे से जोड़ने में जुटी हैं। एजेंसी सूत्रों के अनुसार डॉ. शाहीन खाड़ी देश में जाकर पाकिस्तानी हैंडलर से मिलने वाली थी। क्यों मिलने वाली थी, इस बात का पता नहीं चल सका है।
बता दें कि डॉ. शाहीन को फरीदाबाद और गुड़गांव में निशानदेही के लिए भी लाया गया था। आतंकी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार अल फलाह यूनिवर्सिटी की डॉक्टर शाहीन को यूनिवर्सिटी भी ले जाया गया था। जांच एजेंसियों ने उसके पास से करीब साढ़े 18 लाख रुपए नकद और 300 ग्राम सोना भी बरामद किया था।
डॉ. शाहीन ने दिल्ली ब्लास्ट से 7 दिन पहले ही पासपोर्ट वेरिफिकेशन कराया था, लेकिन वेरिफिकेशन में संदेह होने पर पुलिस पासपोर्ट से संबधित रिपोर्ट को जमा नहीं कराई, जिस कारण वह विदेश नहीं भाग सकी। यही नहीं शाहीन ने अपने एक ही पासपोर्ट में कुछ सालों के अंतराल में तीन बार एड्रेस चेंज कराया था।
6 साल सऊदी अरब में क्या कर रही थी शाहीन?
सूत्रों की मानें तो डॉक्टर शाहीन के लॉकर से सऊदी अरब की करेंसी मिलने के बाद एनआईए अब शाहीन की पूर्व में की गई यात्राओं का रिकॉर्ड खंगाल रही है। बताया जाता है कि साल 2018 से 2024 तक वह सऊदी अरब में रही है। इस दौरान उसने बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर आदि देशों की यात्राएं की हैं। एनआईए अब उसकी यात्राओं में उससे कौन मिला, इसकी जांच कर रही है।
पासपोर्ट में तीन बार पता बदला
पुलिस सूत्रों ने बताया कि डॉक्टर शाहीन ने अपना पासपोर्ट कानपुर से बनवाया था। तब वह कानपुर में साल 2006 से 2013 तक जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में फार्माकोलॉजी की प्रवक्ता और विभागाध्यक्ष रही। इसके उसने अपने पिता के घर लखनऊ का अड्रेस चेंज कराया था। साल 2021 में जब डॉक्टर शाहीन अल फलाह यूनिवर्सिटी में नौकरी शुरू की तो उसने पासपोर्ट में अपना एड्रेस धौज स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस ब्लॉक 15, फ्लैट नंबर 32 दर्ज कराया था। धौज पुलिस जब उसके अड्रेस के वेरिफिकेशन करने को फोन किया तो वह नहीं आयी। इसलिए धौज पुलिस ने वेरिफिकेशन रिपोर्ट आगे नहीं बढ़ाई थी।
कहां से आई रकम, पता लगा रहे
डॉक्टर शाहीन की यूनिवर्सिटी में कराई गई निशानदेही में हॉस्टल के रूम में रखी अलमारी से करीब साढ़े 18 लाख रुपये मिले हैं। एनआईए अब इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी डॉक्टर शाहीन के पास इतनी नकदी कहा से और किस काम से आयी थी। आशंका है कि डॉक्टर शाहीन को आतंकी संगठनों के माध्यम से फंडिग की जा रही थी। पूछताछ में डॉक्टर शाहीन जांच एजेंसी को सही जवाब नहीं दे रही है। एजेंसी की जांच में तीन एनजीओ के बैंक खाते में कई संदिग्ध लेनदेन मिले है। इसकी भी जांच की जा रही है।
शाहीन ने पुलिस को नहीं दी कार की चाबी
डॉ. आदिल की गिरफ्तारी के बाद जेएंडके पुलिस के इनपुट पर जब फरीदाबाद पुलिस ने डॉ. शाहीन को हिरासत में लेकर उसकी नई ब्रेजा कार की चाबी मांगी तो उसने इनकार करते हुए कहा कि कहीं गुम हो गई है। इसके बाद पुलिस ने अस्पताल परिसर में स्थित उसके हॉस्टल ब्लॉक नंबर 15 के फ्लैट नबर 32 की चाबी लेकर जब जांच की तो वहा नई ब्रेजा कार की चाबी मिल गई।
फरीदाबाद पुलिस ने जब कार की तलाशी ली तो उसमें जो अत्याधुनिक हथियार मिला उसे देखकर पुलिसकर्मी भी हैरान हो गए, क्योकि गाड़ी के अंदर पुलिस ने एक क्रिनकॉव असाल्ट राइफल व एक विदेशी पिस्टल बरामद की थी। इसके बाद ही पुलिस को इसके आतंकी संगठनों में शामिल होने का शक हुआ। पुलिस ने बताया कि कार में एके क्रिनकॉव का मिलना काफी अहम रहा, क्योंकि एके क्रिनकॉव देखने में भले ही छोटी लगती हो, लेकिन यह कॉम्पैक्ट राइफल 1979 में सोवियत संघ में बनाई गई थी। इसकी डिजाइन ऐसी है कि यह हल्की, छोटी और तंग जगहों पर आसानी से रखी जा सकती है।
खास बात ये है कि जेएंडके पुलिस डॉ. आदिल की गिरफ्तारी के बाद मिले इनपुट पर सिर्फ रूटीन चेकिंग के लिए यहां आई थी। कार से हथियार बरामद होने के बाद फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर पुलिस को आरोपियों के इरादे का अंदाजा लगा और फिर सारी एजेसियां हरकत में आयीं।