अदालत में बोले विवेक आर्य, पोस्टल बैलेट का रिवेरिफिकेशन कराया था उस समय हारने वाले पक्ष का कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था
देवेंद्र अत्री 10 अप्रैल तक अदालत को सौंपेंगे गवाहों की सूची, 16 से गवाही

सत्य खबर हरियाणा
Uchana Assembly : पूर्व सांसद बृजेन्द्र सिंह द्वारा दायर चुनाव याचिका में आज पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय में उचाना विधानसभा के निर्वाचन अधिकारी रहे विवेक आर्य का बयान दर्ज किया गया। विवेक आर्य चुनाव के समय जींद में एडीसी थे और इस नाते वह उचाना विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी भी थे। आज विवेक आर्य की गवाही पूरी कर ली गई।
आईएएस विवेक आर्य ने गवाही के दौरान बताया कि उन्होंने पोस्टल बैलेट का रिवेरिफिकेशन कराया था। हालांकि उस समय वहां पर सिर्फ अधिकारीगण, जीतने वाले पक्ष के लोग ही मौजूद थे। हारने वाले पक्ष का कोई भी व्यक्ति उस समय वहां मौजूद नहीं था। इस पर उनसे सवाल किया गया कि क्या आपके द्वारा उन्हें बुलाया गया था। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उनके द्वारा माइक पर अनाउंस करवाया गया था कि हम इस विधानसभा के पोस्टल बैलेट का रिवेरिफिकेशन करा रहे हैं, लेकिन इसका हमारे पास अभी कोई लिखित रिकार्ड नहीं है।
गवाही पूरे होने के बाद अब पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से दूसरे पक्ष यानी बीजेपी विधायक देवेंद्र अत्री से गवाहों की लिस्ट मांगी गई है। कहा गया है कि 10 अप्रैल तक गवाहों की लिस्ट हाईकोर्ट में सबमिट कर दी जाएगी। यह भी कहा गया है कि मामले में 16 अप्रैल से गवाही शुरू की जाएगी।
उच्च न्यायालय द्वारा याचिका संबंधित सुनवाई के लिए अगली तारीख 16 अप्रैल निर्धारित की गई। इस दिन देवेंद्र अत्री के गांव की गवाही शुरू करवाई जाएगी।
विधानसभा चुनाव के परिणाम के खिलाफ मार्च में बृजेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कहा था कि जो कैंसिल या रिजेक्ट वोट होते हैं, यदि उसका अंतर इलेक्शन की हार-जीत के अंतर से ज्यादा है, तो गिनती खत्म होने के बाद उन सभी कैंसिल वोटों की दोबारा से जांच रिटर्निंग अधिकारी को मौके पर करनी होती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह ने कहा था कि 150 वोट केवल इसलिए कैंसिल किए गए हैं, क्योंकि पोस्टल बैलेट के लिफाफे के ऊपर जो स्कैनर था, उनकी स्कैनिंग नहीं हो पा रही थी, इसलिए वो रिजेक्ट के डिब्बे में डाले गए। जिन वोटों की स्कैनिंग नहीं होती, तो उन लिफाफों को कैसे खोलना है, इसकी भी प्रक्रिया है, जो गिनती के दौरान नहीं की गई। वोटों की जीत-हार का अंतर मात्र 32 वोटों का है, इसलिए यह काउंटिंग जरूरी थी।
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