दिल्ली विधानसभा में घुसा युवक कौन था कैसे हुई इतनी बड़ी सुरक्षा चूक सामने

देश की राजधानी दिल्ली में एक गंभीर सुरक्षा चूक सामने आई जब एक युवक ने अपनी कार सीधे दिल्ली विधानसभा परिसर में घुसा दी। आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के निवासी सरबजीत सिंह के रूप में हुई है। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे रूपनगर इलाके से गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासन को तुरंत जांच के आदेश देने पड़े हैं।
कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम और अंदर क्या हुआ
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सरबजीत सिंह ने दोपहर लगभग 2 बजकर 5 मिनट पर गेट नंबर 2 से बैरियर तोड़ते हुए विधानसभा परिसर में प्रवेश किया। अंदर पहुंचने के बाद वह विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की आधिकारिक गाड़ी तक पहुंचा और उसमें फूलों का गुलदस्ता और माला रख दी। बताया गया कि वह कुछ समय के लिए उसी गाड़ी में बैठा भी रहा। इसके बाद उसने स्पीकर के कार्यालय के बाहर एक और गुलदस्ता रखा और उसी गेट से बाहर निकल गया जिससे वह अंदर आया था। घटना के बाद पुलिस ने तुरंत नाकेबंदी कर उसे रूपनगर के पास एक पिकेट पर पकड़ लिया और उसकी गाड़ी भी जब्त कर ली गई।

परिवार का दावा और आरोपी की मानसिक स्थिति पर सवाल
आरोपी के परिवार ने दावा किया है कि सरबजीत मानसिक रूप से अस्थिर है। उसकी मां के अनुसार वह पिछले पांच दिनों से घर से लापता था और परिवार को उसकी कोई जानकारी नहीं थी। बताया गया कि वह 1 अप्रैल को पीलीभीत से निकला और 2 अप्रैल को बरेली पहुंचा था लेकिन इसके बाद वह कहां गया इसकी कोई जानकारी परिवार के पास नहीं है। परिवार का कहना है कि वह अक्सर बिना बताए घर से निकल जाता था और किसी से ज्यादा बातचीत भी नहीं करता था। मां ने यह भी कहा कि गुस्से में वह परिवार के सदस्यों से भी ठीक से पेश नहीं आता था और अचानक घर छोड़ देता था।
जांच के आदेश और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार यह जांच अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी की निगरानी में की जाएगी। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सुरक्षा में चूक कैसे हुई और आरोपी इतनी आसानी से विधानसभा परिसर के अंदर कैसे पहुंच गया। पुलिस फिलहाल सरबजीत सिंह से पूछताछ कर रही है लेकिन उसने अब तक अपने इस कदम के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है। इस घटना ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई है बल्कि संवेदनशील सरकारी परिसरों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।