ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने इस सैन्य अभियान के पीछे की सोच पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि भारत की उदारता और सहनशीलता को कमजोरी समझना बड़ी भूल होगी और जरूरत पड़ने पर देश कड़ा जवाब देने में सक्षम है।
भारत की सहनशीलता कमजोरी नहीं: डोभाल
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत की रणनीतिक सोच पर बड़ा बयान दिया है। डिस्कवरी की आगामी डॉक्यूमेंट्री सीरीज ‘Declassified: Operation Sindoor’ में उन्होंने कहा कि भारत की उदारता और सहनशीलता को उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
डोभाल के मुताबिक भारत जोखिम उठाने की क्षमता रखता है और जरूरत पड़ने पर कड़ा प्रहार भी कर सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब ऑपरेशन सिंदूर के फैसलों और उसके पीछे की रणनीति को लेकर पहली बार सुरक्षा नेतृत्व की विस्तृत बातें सामने आने वाली हैं।
88 घंटे के अभियान का क्या था लक्ष्य?
डोभाल ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य दुश्मन के उन ठिकानों को नष्ट करना था, जिन्हें पहलगाम आतंकी हमले से जोड़ा गया था। उनके अनुसार अभियान का लक्ष्य स्पष्ट और सीमित था।
यह सैन्य कार्रवाई करीब 88 घंटे तक चली। इस दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ा और दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियां तेज हुईं। बाद में 10 मई को संघर्ष थमा।

पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को हुई थी। इससे पहले 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाकर सैन्य कार्रवाई की।
इसके बाद पाकिस्तान की ओर से भी सैन्य कार्रवाई हुई और भारत ने उसके जवाब में अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाई। इस तरह दोनों परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच तनाव कई घंटों तक जारी रहा।
डॉक्यूमेंट्री में सामने आएंगे बड़े फैसले
‘Declassified: Operation Sindoor’ दो हिस्सों वाली डॉक्यूमेंट्री सीरीज है। इसमें भारत के सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा नेतृत्व से जुड़े लोगों के अनुभवों के जरिए ऑपरेशन की घटनाओं और महत्वपूर्ण फैसलों को सामने रखने की कोशिश की गई है।
डोभाल भी इसमें सैन्य जवाबी कार्रवाई के पीछे की रणनीति और फैसलों पर बात करते दिखाई देंगे। रिपोर्टों के मुताबिक सीरीज का प्रीमियर 15 अगस्त की रात 9 बजे Discovery और discovery+ पर होगा।
दुनिया को क्या संदेश देना चाहते हैं डोभाल?
डोभाल का बयान सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा तक सीमित नहीं है। इसमें भारत की सुरक्षा नीति को लेकर एक व्यापक संदेश भी दिखाई देता है। उनका जोर इस बात पर है कि शांतिपूर्ण रवैया अपनाना और जरूरत पड़ने पर जवाब देने की क्षमता रखना, दोनों एक साथ संभव हैं।
उनका कहना है कि भारत अपनी सहनशीलता को कमजोरी के रूप में देखे जाने की अनुमति नहीं दे सकता। यानी बातचीत और संयम के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई की क्षमता भी जरूरी है।
ऑपरेशन सिंदूर की कहानी अब पर्दे पर
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अब तक सामने आई जानकारी मुख्य रूप से आधिकारिक बयानों और सैन्य अपडेट तक सीमित रही है। ऐसे में डॉक्यूमेंट्री के जरिए सुरक्षा और सैन्य नेतृत्व के अनुभव सामने आना इसे खास बनाता है।
डोभाल का यह इंटरव्यू इस कहानी को एक रणनीतिक नजरिया देता है। भारत की सहनशीलता, जवाब देने की क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन—ऑपरेशन सिंदूर की कहानी का यही सबसे बड़ा संदेश बनकर उभर रहा है।