बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजे अब कल यानी 14 नवंबर को घोषित होने वाले हैं। इस दिन यह साफ हो जाएगा कि बिहार की सत्ता किसके हाथ में जाएगी। क्या नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे या तेजस्वी यादव पहली बार मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभालेंगे। हालांकि इसके पहले ही कई मीडिया संस्थानों द्वारा कराए गए एग्जिट पोल में NDA की सरकार बनने की संभावना जताई गई है। लगभग हर एग्जिट पोल में NDA को बहुमत का दावा किया गया है।
NDA को मिल सकता है बहुमत
बिहार विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों का समर्थन जरूरी है। यदि एग्जिट पोल के अनुमान सच्चे साबित होते हैं तो निश्चित रूप से नीतीश कुमार अगली सरकार के मुख्यमंत्री बनेंगे। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह तक ने कई रैलियों में कहा कि नीतीश कुमार की अगुवाई में NDA की सरकार दोबारा बनेगी। चुनाव NDA ने नीतीश कुमार की अगुवाई में लड़ा है, जो उनकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है।

तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की चुनौती
वहीं तेजस्वी यादव और राहुल गांधी जैसे नेताओं ने यह साफ कहा है कि BJP नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद नहीं दिलाएगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति तभी बन सकती है जब BJP और JDU के बीच सीटों में बड़ा फर्क आए। अगर मामला सीमा पर अटका रहता है तो नीतीश कुमार का भविष्य अनिश्चित हो सकता है। ऐसा भी नहीं कि नीतीश कुमार ने पहले Grand Alliance ज्वॉइन नहीं किया है। हालांकि NDA में लौटने के बाद उन्होंने कई बार कहा है कि वे NDA छोड़ने वाले नहीं हैं, लेकिन उनकी अगली चाल क्या होगी यह केवल वे ही जानते हैं।
Grand Alliance की स्थिति साफ
वहीं दूसरी तरफ Grand Alliance की तस्वीर साफ है। इस गठबंधन में RJD, कांग्रेस और VIP शामिल हैं और तेजस्वी यादव इस गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरा हैं। चुनाव के समय यह बात स्पष्ट कर दी गई थी। इसका मतलब है कि यदि एग्जिट पोल के नतीजे गलत साबित होते हैं तो तेजस्वी यादव बिहार के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं।
राजनीतिक नाटक जारी, परिणाम होंगे निर्णायक
राजनीतिक माहौल फिलहाल बहुत ही तनावपूर्ण और उलझा हुआ है। कई दलों के बीच सत्ता संघर्ष अपनी चरम सीमा पर है। अब सबकी निगाहें 14 नवंबर के नतीजों पर लगी हैं। ये नतीजे बिहार के भविष्य को तय करेंगे। जनता के फैसले से ही पता चलेगा कि बिहार की जनता ने किसे अपनी सेवा के लिए चुना है। चाहे नीतीश कुमार फिर से सत्ता में आएं या तेजस्वी यादव नई सरकार बनाएं, बिहार का राजनीतिक परिदृश्य जरूर इतिहास का नया पन्ना लिखेगा।