दिल्ली में जारी प्रदर्शन के बीच राजनीतिक घटनाक्रम लगातार बदल रहा है। एक ओर CJP ने अपने संस्थापक अभिजीत दीपके को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा किया है, तो दूसरी ओर पार्टी ने सरकार के साथ बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात भी कही है।
CJP ने हिरासत में लिए जाने का किया दावा
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, इस दावे पर पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
सांसदों से समर्थन की अपील
सौरव दास ने अपने पोस्ट में सभी सांसदों से अपील की कि वे सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के समर्थन में आगे आएं। उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती बरती जा रही है और उन्हें बलपूर्वक हटाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शन को लेकर राजधानी के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी कर दी गई है।

जंतर-मंतर पर बना तनावपूर्ण माहौल
जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही। विभिन्न घटनाओं को लेकर दोनों पक्ष अपनी-अपनी बातें रख रहे हैं। प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहा है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कर रहे हैं।
जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद क्या बोले सौरव दास?
इसी बीच सौरव दास ने बताया कि उन्होंने और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। उनके अनुसार, करीब दो घंटे इंतजार करने के बाद दोनों नेताओं की लगभग 10 मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान CJP ने अपनी मांगों का लिखित ज्ञापन सौंपा और सरकार की ओर से आगे बातचीत का आश्वासन मिलने की बात कही।
बातचीत की दिशा पर टिकी निगाहें
CJP का कहना है कि वह संवाद के जरिए अपनी मांगों का समाधान चाहती है। वहीं सरकार की ओर से औपचारिक बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ने के संकेत मिलने के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर क्या फैसला निकलता है और आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।
दिल्ली में जारी प्रदर्शन अब केवल सड़क तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है। हिरासत के दावे, सरकार से बातचीत और प्रदर्शन के बीच अब आगे की स्थिति दोनों पक्षों के अगले कदमों पर निर्भर करेगी।