संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के सवालों से बचती रही और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसद में चर्चा नहीं होने दी गई। उन्होंने सत्र को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
‘सरकार को इतना डरा हुआ पहली बार देखा’
गौरव गोगोई ने कहा कि उन्होंने पहली बार किसी संसद सत्र के दौरान सरकार को इतना डरा और सहमा हुआ देखा। उनका आरोप था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन की कार्यवाही से दूर रहे।
गोगोई ने कहा कि विपक्ष ने सत्र शुरू होने से पहले ही सरकार को बता दिया था कि कई अहम मुद्दों पर चर्चा जरूरी है, लेकिन इन मांगों को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया।
NEET से लेकर राम मंदिर ट्रस्ट तक मुद्दे
कांग्रेस सांसद ने कहा कि विपक्ष NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ी, अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को मिले दान में कथित चोरी और इथेनॉल में मिलावट जैसे मुद्दों को संसद में उठाना चाहता था।
इसके अलावा बीजेपी शासित एक राज्य के मुख्यमंत्री पर लगे कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप, विदेश नीति, चीन से जुड़ी सुरक्षा चिंताएं और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में टैक्सपेयर्स के पैसे के इस्तेमाल को लेकर भी विपक्ष चर्चा चाहता था।

‘सरकार के बिलों पर हमारा रुख सकारात्मक था’
गोगोई ने कहा कि विपक्ष ने शुरुआत से स्पष्ट किया था कि सरकार द्वारा लाए गए विधेयकों को लेकर उसका रुख सकारात्मक रहेगा। हालांकि, इसके साथ विपक्ष चाहता था कि उसके उठाए मुद्दों पर भी सदन में चर्चा हो।
उनके मुताबिक, लगभग 21 दिन बीत गए और सरकार ने अपने कई विधेयक पारित करा लिए, लेकिन विपक्ष के महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई।
छात्र आंदोलन का भी किया जिक्र
कांग्रेस सांसद ने जंतर-मंतर समेत देशभर में हुए छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इन प्रदर्शनों से बने माहौल का सरकार पर दबाव पड़ा।
गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार को शिक्षा से जुड़े कदम उठाने और पेपर लीक से संबंधित संशोधन लाने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि संबंधित विधेयक की तैयारी सरकार ने पहले ही कर ली थी।
संसद में गतिरोध पर आमने-सामने सत्ता-विपक्ष
मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिला। विपक्ष अपनी मांगों पर कायम रहा और गृह मंत्री अमित शाह के बयान समेत छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर जवाबदेही की मांग करता रहा।
वहीं, सरकार का कहना रहा कि विपक्ष चर्चा के बजाय हंगामा कर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है। इस राजनीतिक खींचतान के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
अब सड़क से संसद तक जारी रहेगी सियासी लड़ाई?
मानसून सत्र खत्म हो गया, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मुद्दों की लड़ाई खत्म होती नहीं दिख रही। कांग्रेस जहां सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगा रही है, वहीं बीजेपी विपक्ष पर संसद को बाधित करने का आरोप लगाती रही है।
अब सवाल यह है कि अगले सत्र में क्या इन मुद्दों पर वास्तविक बहस होगी या राजनीतिक टकराव फिर सदन की कार्यवाही पर भारी पड़ेगा। संसद लोकतंत्र की बहस का मंच है और जनता की नजर इसी पर है कि अगले सत्र में शोर ज्यादा सुनाई देगा या समाधान की आवाज।