दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच बातचीत का दौर तेज हो गया है। जहां एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने सरकार के लिखित आश्वासन के बाद अपना 26 दिन का अनशन समाप्त कर दिया, वहीं CJP ने साफ कर दिया है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक उसका आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार और CJP के बीच डेढ़ घंटे चली बैठक
शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने CJP प्रतिनिधियों से मुलाकात की। बैठक में CJP की ओर से सौरभ दास और आशुतोष रांका शामिल हुए। दोनों पक्षों के बीच करीब डेढ़ घंटे तक चर्चा हुई, जिसमें CJP ने अपनी पांच पैराग्राफ की लिखित मांग सरकार के सामने रखी। बैठक में छात्र आंदोलन और परीक्षा सुधार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई।
न्यूट्रल जगह पर बातचीत को मिली सहमति
बताया गया कि सरकार ने पहले CJP को जेपी नड्डा के आवास या कार्यालय में बातचीत का प्रस्ताव दिया था। हालांकि CJP ने जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर चर्चा की मांग की। इसके बाद दोनों पक्षों की सहमति से दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक आयोजित की गई। माना जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी रहने से आंदोलन को लेकर किसी समाधान की संभावना बन सकती है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग बरकरार
सोनम वांगचुक द्वारा अनशन समाप्त किए जाने के बावजूद CJP अपने रुख पर कायम है। संगठन का कहना है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कोई समाधान स्वीकार नहीं होगा। CJP नेता अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा। यह CJP का दावा और राजनीतिक रुख है।
पेपर लीक पर नए कानून की तैयारी
इस बीच केंद्र सरकार पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई के लिए नए कानून की तैयारी कर रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित विधेयक के मसौदे पर कैबिनेट स्तर पर चर्चा चल रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित कानून में ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में तय समय सीमा के भीतर कराने, दोषियों के लिए 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान हो सकता है। अंतिम प्रावधान संसद में पेश होने वाले विधेयक के बाद ही स्पष्ट होंगे।
आगे क्या होगा?
सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत जारी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि बातचीत से सहमति बनती है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है। वहीं, प्रस्तावित पेपर लीक कानून और उस पर संसद में होने वाली चर्चा पर भी देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।