NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी डॉ. मनोज शिरूरे को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने CBI की दलीलों और मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
CBI ने क्या लगाए आरोप?
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अनुसार, डॉ. मनोज शिरूरे ने तीन छात्रों को केमिस्ट्री के प्रश्न उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच एजेंसी का दावा है कि इन छात्रों में एक आरोपी कोचिंग सेंटर संचालक का बेटा भी शामिल था। CBI ने अदालत में कहा कि इस कथित साजिश में डॉ. शिरूरे की भूमिका जांच के लिए महत्वपूर्ण है।
पी.वी. कुलकर्णी के साथ मिलीभगत का आरोप
CBI का आरोप है कि डॉ. मनोज शिरूरे ने आरोपी पी.वी. कुलकर्णी के साथ मिलकर छात्रों तक केमिस्ट्री के प्रश्न पहुंचाने में मदद की। जांच एजेंसी के मुताबिक, उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने इन दलीलों पर विचार करते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।

क्या है NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला?
यह मामला 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा से जुड़ा है। पेपर लीक और कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद केंद्र सरकार की मंजूरी के पश्चात NTA ने 12 मई 2026 को परीक्षा रद्द कर दी थी। इसके बाद 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई सख्ती
इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार और NTA से परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के उपायों पर जवाब मांगा है। अदालत ने कंप्यूटर आधारित परीक्षा, प्रश्नपत्र वितरण व्यवस्था और साइबर सुरक्षा जैसे पहलुओं पर विस्तृत जानकारी देने को कहा तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
जंतर-मंतर पर जारी है छात्रों का प्रदर्शन
NEET पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन अभी भी जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, जवाबदेही तय करने और विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर देशभर में राजनीतिक और कानूनी बहस भी जारी है।