डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। 21 दिन की फरलो मिलने के बाद वह मंगलवार सुबह सुनारिया जेल से निकला। इस बार उसे सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के मुख्य आश्रम में रहने की अनुमति मिली है।
21 दिन की फरलो पर बाहर आया राम रहीम
साध्वियों के यौन शोषण के मामले में रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम को 21 दिन की फरलो मंजूर हुई है। मंगलवार, 25 अगस्त को वह जेल से बाहर आया। फरलो की अवधि के दौरान वह सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के मुख्य आश्रम में रहेगा।
2017 के बाद 17वीं बार जेल से बाहर
राम रहीम के जेल से बाहर आने का यह सिलसिला नया नहीं है। 2017 में सजा सुनाए जाने के बाद वह पैरोल और फरलो के जरिए कई बार जेल से बाहर आ चुका है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अब तक वह 16 बार बाहर आ चुका था और यह उसकी 17वीं रिहाई है।
इसी वजह से उसकी पैरोल और फरलो को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल भी उठते रहे हैं।

इस बार सिरसा आश्रम जाने की अनुमति
राम रहीम को पहले पैरोल या फरलो के दौरान उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित बरनावा आश्रम भेजा जाता रहा है। हालांकि इस बार उसे सिरसा के मुख्य डेरा सच्चा सौदा आश्रम में रहने की अनुमति मिली है।
यह लगातार तीसरी बार बताया जा रहा है जब उसे सिरसा आश्रम जाने की अनुमति मिली है।
20 साल की सजा काट रहा है राम रहीम
राम रहीम को 2017 में दो साध्वियों के यौन शोषण के मामले में विशेष CBI अदालत ने दोषी ठहराया था। दोनों मामलों में उसे 10-10 साल की सजा सुनाई गई। इसके अलावा वह डेरा सच्चा सौदा के पूर्व प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या के मामले में भी दोषी ठहराया जा चुका है।
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में भी उसे दोषी करार दिया गया था।
पहले भी मिल चुकी है पैरोल
राम रहीम को इससे पहले भी कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है। मई 2026 में उसे 30 दिन की पैरोल मिली थी। अब कुछ ही महीनों के भीतर वह 21 दिन की फरलो पर फिर जेल से बाहर आया है।
उसकी लगातार रिहाई के कारण यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।
फरलो के साथ फिर उठे सवाल
राम रहीम की हर नई पैरोल या फरलो के साथ उसके जेल से बाहर आने की परिस्थितियां बहस का विषय बनती रही हैं। इस बार भी 21 दिन की फरलो और सिरसा आश्रम में रहने की अनुमति को लेकर नजरें प्रशासनिक प्रक्रिया और आगे की गतिविधियों पर रहेंगी।
राम रहीम की यह 17वीं रिहाई केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि उसके प्रभाव और बार-बार मिलने वाली पैरोल-फरलो को लेकर चल रही पुरानी बहस को भी फिर सामने ले आई है।