दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया। यह मामला उनके WFI प्रमुख रहने के दौरान लगाए गए आरोपों से संबंधित था।
2023 में दाखिल हुई थी चार्जशीट
दिल्ली पुलिस ने 15 जून 2023 को इस मामले में लगभग 1,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 354, 354A, 354D और 506(1) के तहत यौन उत्पीड़न, महिलाओं के खिलाफ आपराधिक बल के प्रयोग और आपराधिक धमकी जैसे आरोप शामिल किए गए थे। विनोद तोमर को भी इस मामले में सह-आरोपी बनाया गया था।
बंद कमरे में हुई अंतिम सुनवाई
पिछले महीने अदालत ने मामले में अंतिम निर्णय के लिए सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। कार्यवाही इन-कैमरा (बंद कमरे) में हुई। दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्वनी पंवार ने आदेश सुरक्षित रखा था। अदालत ने दोनों पक्षों को लिखित दलीलें भी दाखिल करने का निर्देश दिया था।

आंदोलन के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर
यह मामला 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों के विरोध प्रदर्शन के बाद दर्ज एफआईआर से जुड़ा था। प्रदर्शनकारी पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर WFI अध्यक्ष रहते हुए यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की और मामले की सुनवाई शुरू हुई।
फैसले के बाद क्या बोले बृजभूषण?
अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही अपनी बेगुनाही का दावा किया था। उन्होंने कहा, “मैंने पहले दिन ही कहा था कि अगर कोई भी आरोप साबित होता है, तो मैं फांसी लगा लूंगा। आज कोर्ट ने मुझे सम्मान के साथ बरी किया है। यह मेरे लिए खुशी का दिन है।”
राउज एवेन्यू कोर्ट का यह फैसला लंबे समय से चर्चा में रहे मामले में महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर दोनों आरोपियों को बरी किया है। यह निर्णय ट्रायल कोर्ट का है और संबंधित पक्षों के पास कानून के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाने का अधिकार उपलब्ध रहता है।