देशभर में पेपर लीक की घटनाओं से परेशान लाखों छात्रों की नजरें अब संसद पर टिकी हैं। लोकसभा में आज लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक, 2026 पर अहम चर्चा होगी, जहां सरकार और विपक्ष परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए अपने-अपने तर्क रखेंगे।
लोकसभा में खत्म हुआ गतिरोध, आज होगी अहम चर्चा
पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में जारी गतिरोध अब खत्म होता नजर आ रहा है। सोमवार देर शाम सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनने के बाद तय हुआ कि मंगलवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक, 2026 पर चर्चा होगी। इस बहस के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने छह घंटे का समय निर्धारित किया है।
सरकार और विपक्ष के दिग्गज सांसद रखेंगे पक्ष
विधेयक पर चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा करेंगी। भाजपा की ओर से बांसुरी स्वराज, तेजस्वी सूर्या, अनुराग ठाकुर, शशांक मणि त्रिपाठी, भोला सिंह, संजय जायसवाल और विष्णु दत्त शर्मा अपनी बात रखेंगे। वहीं कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, गौरव गोगोई, शफी परम्बिल, बेनी बेहनन और अन्य विपक्षी सांसद भी बहस में हिस्सा लेंगे।

93 संशोधनों में क्या हैं प्रमुख सुझाव?
विपक्षी सांसदों ने विधेयक में कुल 93 संशोधन प्रस्तावित किए हैं। कई सांसदों ने पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वालों के लिए जेल की सजा और आर्थिक जुर्माना बढ़ाने की मांग की है। कुछ सांसद चाहते हैं कि दोषियों की संपत्ति, बैंक खाते, शेयर और अन्य निवेश भी जब्त किए जाएं ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लग सके।
छात्रों के हित में राहत की मांग
कई सांसदों ने सुझाव दिया है कि यदि किसी परीक्षा को पेपर लीक या अन्य अनियमितताओं के कारण रद्द करना पड़े, तो अभ्यर्थियों को परीक्षा शुल्क वापस किया जाए। साथ ही यात्रा खर्च का भुगतान, आयु सीमा में छूट और अतिरिक्त प्रयास (Attempts) का अवसर भी दिया जाए। एक अन्य महत्वपूर्ण सुझाव यह है कि रद्द हुई परीक्षाएं 60 दिनों के भीतर दोबारा आयोजित की जाएं।
परीक्षा सुरक्षा को लेकर नए प्रस्ताव
विधेयक में परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई नए सुझाव दिए गए हैं। इनमें राष्ट्रीय स्तर पर एग्जामिनेशन सिक्योरिटी सेल, नेशनल पब्लिक एग्जामिनेशन इंटीग्रिटी अथॉरिटी, साइबर सुरक्षा ऑडिट, प्रश्नपत्र प्रबंधन की निगरानी और व्हिसलब्लोअर संरक्षण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। कुछ सांसदों ने बड़े पेपर लीक मामलों की जांच हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या CBI से कराने की भी मांग की है।
पेपर लीक केवल एक कानूनी नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। लोकसभा में होने वाली यह चर्चा और विधेयक में किए जाने वाले संभावित बदलाव आने वाले समय में देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अब छात्रों और अभिभावकों की उम्मीदें इस बात पर टिकी हैं कि संसद एक ऐसा कानून बनाए जो नकल और पेपर लीक पर प्रभावी अंकुश लगा सके।