दिल्ली के जंतर-मंतर और बिहार के सीवान में छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित रूप से पैलेट गन और AK-47 के इस्तेमाल के आरोपों ने बल प्रयोग की वैधता और भीड़ नियंत्रण के नियमों पर नई बहस छेड़ दी है। इन घटनाओं के बाद कानून, पुलिस प्रक्रियाओं, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। ध्यान रहे कि हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े कई आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक निष्कर्ष अभी सामने आना बाकी है।
पैलेट गन और AK-47 को लेकर क्या है विवाद?
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया, जिससे कई लोग घायल हुए। दूसरी ओर, 25 जुलाई को बिहार के सीवान में NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान AK-47 से फायरिंग का कथित वीडियो सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया। इन घटनाओं की जांच और आधिकारिक तथ्यों का इंतजार है।
कानून और गाइडलाइंस क्या कहती हैं?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 148 के तहत गैरकानूनी भीड़ को हटाने के लिए सीमित परिस्थितियों में बल प्रयोग का प्रावधान है। सामान्य प्रक्रिया के अनुसार पहले चेतावनी देना, भीड़ को तितर-बितर होने का अवसर देना और आवश्यकता पड़ने पर क्रमिक उपाय अपनाना अपेक्षित होता है। भीड़ नियंत्रण में कम-घातक साधनों का उपयोग भी अंतिम विकल्प माना जाता है। किसी भी कार्रवाई में परिस्थितियों के अनुरूप न्यूनतम आवश्यक बल प्रयोग का सिद्धांत महत्वपूर्ण माना जाता है।

RAF की समीक्षा और परिचालन संबंधी सवाल
घटनाओं के बाद रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की आंतरिक समीक्षा का भी उल्लेख सामने आया, जिसमें परिचालन संबंधी कमियों, प्रशिक्षण और ब्रीफिंग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ उपकरणों के उपयोग पर अगले आदेश तक रोक लगाने और कई सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही गई। हालांकि इन निष्कर्षों और कार्रवाई का आधिकारिक विवरण संबंधित एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार ही माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
27 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है और केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस की कथित ज्यादतियों को उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए एक समान प्रोटोकॉल और स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता पर विचार किया जाना चाहिए। यह अदालत की मौखिक टिप्पणियां थीं और मामले की सुनवाई जारी है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी हुईं तेज
इन घटनाओं को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। राहुल गांधी ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित बल प्रयोग को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की और प्रधानमंत्री से जवाब मांगने की बात कही। वहीं सरकार और संबंधित एजेंसियों की ओर से अलग-अलग मौकों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मामलों की जांच जारी होने की बात कही गई है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों के बीच अंतिम तथ्य संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होंगे।