केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को नई राजनीतिक दिशा मिल गई है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे आंदोलन की बड़ी जीत बताया, जबकि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।
अभिजीत दीपके ने इस्तीफे को बताया आंदोलन की जीत
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि यदि लोग बिना डरे अपनी मांगों पर डटे रहें तो सरकार को भी झुकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है और आंदोलन अभी आगे भी जारी रहेगा।
सरकार और पुलिस पर भी साधा निशाना
अभिजीत दीपके ने दावा किया कि कई नेताओं ने उन्हें पहले कहा था कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन अब यह धारणा बदल गई है। उन्होंने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए भी तीखी टिप्पणी की। यह बयान आंदोलन के दौरान उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा था।

विपक्षी नेताओं ने दी अपनी प्रतिक्रिया
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोशल मीडिया पर छात्रों और युवाओं के आंदोलन की सराहना करते हुए इसे उनकी जीत बताया। वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि देशभर के युवाओं के आंदोलन ने सरकार को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुई यह लड़ाई अब रोजगार और जवाबदेही जैसे बड़े मुद्दों तक जाएगी।
अधीर रंजन चौधरी ने क्या कहा?
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यदि सरकार पहले ही यह कदम उठा लेती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। उनके अनुसार, सरकार को परिस्थितियों के दबाव में यह फैसला लेना पड़ा। यह विपक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया है, जबकि सरकार की ओर से इस्तीफे के कारणों पर अलग आधिकारिक पक्ष सामने आ सकता है।
आंदोलन और राजनीति पर बनी रहेगी नजर
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और विभिन्न राजनीतिक दल लगातार अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।