20 जुलाई 2026 को दिल्ली में NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ ‘चलो संसद’ मार्च देखते ही देखते बड़े टकराव में बदल गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के अलग-अलग दावों के बीच यह दिन देश की राजनीति और छात्र आंदोलनों के लिए एक अहम मोड़ बन गया।
संसद मार्च: सुबह से शाम तक क्या-क्या हुआ?
20 जुलाई 2026 की सुबह संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली का माहौल पूरी तरह बदला हुआ था। जंतर-मंतर पर हजारों छात्र, अभिभावक, शिक्षक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थक ‘चलो संसद’ अभियान के तहत एकत्र हुए। पुलिस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि संसद की ओर मार्च की अनुमति नहीं होगी। सुबह करीब 8:30 बजे दिल्ली पुलिस और CJP नेताओं के बीच बातचीत हुई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद प्रदर्शन स्थल के प्रवेश और निकास मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी गई।
पहली झड़प से पूरे इलाके में तनाव
करीब 10:30 बजे प्रदर्शनकारियों का एक समूह बैरिकेड्स पार करने की कोशिश करने लगा। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों ने पत्थरबाजी की, जबकि CJP ने आरोप लगाया कि पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर भी दोनों पक्षों ने अलग-अलग दावे किए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पत्थर फेंकने के आरोपों को खारिज किया, जबकि CJP ने कुछ वीडियो साझा कर विपरीत दावा किया।

दोपहर में बढ़ा टकराव, आंसू गैस और लाठीचार्ज
करीब 12:12 बजे CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार से बातचीत की कोशिश जारी है और सभी से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक बने रहने की अपील की। हालांकि दोपहर बाद कई समूह अलग-अलग रास्तों से संसद क्षेत्र की ओर बढ़े। रायसीना रोड, अशोका रोड, जनपथ और कनॉट प्लेस सहित कई इलाकों में तनाव बढ़ गया। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया, जबकि प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने का प्रयास करते रहे। इसके बाद रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी तैनात किया गया।
शाम तक हटाया गया प्रदर्शन स्थल
शाम करीब चार बजे सुरक्षा बलों ने प्रदर्शन स्थल खाली कराना शुरू किया। मंच, तंबू और अन्य अस्थायी ढांचे हटाए गए। पुलिस के अनुसार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यह कार्रवाई की गई। दूसरी ओर, अभिजीत दीपके, CJP के अन्य प्रतिनिधि और सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने केरल हाउस के पास अपना धरना जारी रखा।
दोनों पक्षों के दावे और आगे की स्थिति
दिल्ली पुलिस का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए, 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया और कई सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा। वहीं CJP का कहना है कि 50 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए, 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया तथा कई छात्रों के सिर में गंभीर चोटें आईं। CJP ने कुछ पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए, जिन्हें पुलिस ने पूरी तरह खारिज किया। इस बीच केंद्रीय दिल्ली के कुछ इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहीं, कई सड़कें जाम रहीं और संसद में भी NEET मुद्दे पर विपक्ष के विरोध के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।