सोनीपत में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक ऐसा मामला उजागर किया जिसने सभी को चौंका दिया। 12 एकड़ जमीन की रियल मालिकाना हक़दारी के लिए दस लोगों ने खुद को फर्जी मदन मोहन घोषित किया। यह जमीन सुल्तानपुर गांव में दिल्ली रोड पर स्थित थी। असली मालिक अमृतसर निवासी मदन मोहन थे, जिनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे नरेंद्र अग्रवाल को भी इस जमीन का पता नहीं था। इस स्थिति का फायदा उठाकर कई लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के साथ खुद को मदन मोहन बताया और जमीन हड़पने की साजिश रची।
फर्जी मदन मोहनों की गिरफ्तारी
ACB ने जनवरी 2021 से इस मामले की जांच शुरू की। अब तक नौ फर्जी मदन मोहन पकड़े जा चुके थे। हाल ही में दसवें फर्जी मदन मोहन और उनके साथी को भी गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली निवासी राजेश जैन और गोहाना निवासी राजेश कुमार शामिल हैं। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया और दो दिन की रिमांड पर लिया गया ताकि अन्य आरोपी भी पकड़े जा सकें।

सरकारी अफसरों की मिलीभगत का शक
जांच में पता चला कि आरोपी राजेश जैन ने मदन मोहन का फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज बनवाए। इन दस्तावेजों के आधार पर उसने खुद को असली मदन मोहन बताया। आरोप है कि सरकारी अफसरों की मिलीभगत से उसने यह जमीन अपने नाम कराई और इसे अन्य लोगों को बेचने की कोशिश की। ACB इस मामले में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
जमीन पर खेती जारी
अभी यह 12 एकड़ जमीन असली वारिस नरेंद्र अग्रवाल के पास है। उन्होंने इसे गांव चौहान जोशी के दीपक को खेती के लिए पट्टे पर दे दिया है। दीपक नियमित रूप से इस जमीन पर खेती कर रहा है। जमीन के मामले में अब तक कई नाम सामने आए हैं और जांच में और खुलासे होने की संभावना है।
जांच और कार्रवाई तेज
ACB की टीम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी कोर्ट परिसर की सड़क पर घूम रहे थे जब उन्हें पकड़ लिया गया। इससे पहले गिरफ्तार नौ आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। दसवें फर्जी मदन मोहन की गिरफ्तारी के बाद जांच को और तेज कर दिया गया है और कई अन्य नाम सामने आने की संभावना है।