Haryana Schools: हरियाणा में गर्मी बनी बच्चों की दुश्मन! स्कूलों के लिए जारी हुए आपातकालीन निर्देश

Haryana Schools: हरियाणा में इस बार गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। एक तरफ तापमान लगातार 40 डिग्री से ऊपर जा रहा है वहीं दूसरी ओर बच्चों की सेहत को लेकर अभिभावकों में चिंता भी बढ़ रही है। ऐसे में हरियाणा शिक्षा निदेशालय ने बड़ा कदम उठाते हुए एक नया फरमान जारी किया है। गर्मी और लू (Heatwave) के चलते विद्यालयों (Schools) में बच्चों की सुरक्षा के लिए 15 अहम दिशा-निर्देश (Guidelines) लागू किए गए हैं जिन्हें सभी स्कूलों को फॉलो करना जरूरी होगा।
राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि इन नियमों की पालना में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए। ये दिशा-निर्देश इस मकसद से बनाए गए हैं कि बच्चों को किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या का सामना न करना पड़े।
धूप में नहीं बैठेंगे बच्चे
दिशा-निर्देशों में सबसे अहम बात यह कही गई है कि अब किसी भी स्कूल में बच्चों को धूप में बैठाकर कोई भी एक्टिविटी (Activity) नहीं करवाई जाएगी। मतलब साफ है – चाहे स्पोर्ट्स (Sports) डे हो चाहे कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम सब कुछ अब क्लासरूम या छायादार जगहों पर ही होगा।
यह भी तय कर दिया गया है कि अब कोई भी कार्यक्रम खुले आसमान के नीचे नहीं होगा। गर्मी के मौसम में बच्चों को लू लगने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है और शिक्षा विभाग इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहता।
पीने के पानी की व्यवस्था
गर्मी में शरीर का पानी जल्दी निकल जाता है और डिहाइड्रेशन (Dehydration) की दिक्कत सामने आती है। इसीलिए निदेशालय ने स्कूलों को आदेश दिया है कि पीने के स्वच्छ पानी की पर्याप्त व्यवस्था हर स्कूल में होनी चाहिए। साथ ही बच्चों को दिन में कम से कम तीन बार पानी पीने की याद दिलाने के लिए खास घंटी बजाई जाएगी। ये अलर्ट बेल (Alert Bell) सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अनिवार्य कर दी गई है।
रेड क्रॉस फंड से ORS की व्यवस्था
हर स्कूल को कहा गया है कि रेड क्रॉस फंड (Red Cross Fund) का इस्तेमाल करके ORS पैकेट्स की व्यवस्था करें। इसके लिए एसएमसी (School Management Committee) को अधिकृत किया गया है। गर्मी में ORS बच्चों को लू से बचाने का सबसे आसान और सस्ता उपाय है।
साथ ही सभी स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि बच्चों को लू से बचने के घरेलू और मेडिकल उपायों की जानकारी दी जाए। इसके लिए विशेष क्लासेस (Awareness Classes) भी आयोजित की जा सकती हैं।
मेडिकल इमरजेंसी के लिए तैयारी
अगर किसी छात्र की तबीयत अचानक बिगड़ती है तो स्कूल को तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करना होगा। इसके लिए हर स्कूल को एम्बुलेंस (Ambulance) और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र का नंबर पहले से उपलब्ध रखना होगा। इसके अलावा शिक्षकों को भी प्राथमिक उपचार (First Aid) का प्रशिक्षण देने की बात कही गई है ताकि किसी भी इमरजेंसी में वे तुरंत सहायता कर सकें।
कक्षा को गर्मी से बचाने के जुगाड़
गर्मी से कक्षाओं को बचाने के लिए खिड़कियों को ढकने का सुझाव दिया गया है। इसके लिए एल्युमिनियम फॉइल (Aluminum Foil) गत्ता या मोटे पर्दों का इस्तेमाल करने को कहा गया है। इससे तेज गर्म हवाओं को अंदर आने से रोका जा सकेगा और कक्षा का तापमान थोड़ा सामान्य रहेगा।
बच्चों को दी गई खास सलाह
बच्चों को घर से निकलते वक्त सिर पर रुमाल कैप या गमछा रखने की सलाह दी गई है। साथ ही उनसे हल्का सुपाच्य और संतुलित भोजन खाने को कहा गया है। बंद वाहनों (Locked Vehicles) में बच्चों को कभी अकेला न छोड़ने का सख्त आदेश भी जारी किया गया है।
अभिभावकों को भी निर्देश दिया गया है कि वे बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं और बच्चों के टिफिन में अधिक तला-भुना न दें। गर्मी में फल दही छाछ जैसी चीजें बच्चों की सेहत के लिए फायदेमंद होती हैं।