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ज्योति मल्होत्रा को नहीं मिली हाईकोर्ट से जमानत

अदालत ने कहा, आरोप देश की संप्रभुता और अखंडता से जुड़ा, इसलिए अत्याधिक सावधानी बरतना आवश्यक

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Jyoti Malhotra : पाकिस्तान की खुफिया एंजेसी आईएसआई को संवेदनशील जानकारी भेजने के आरोपों में गिरफ्तार हरियाणा के हिसार की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध प्रथम दृष्टया साक्ष्यों को देखते हुए ज्योति मल्होत्रा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि आरोप देश की संप्रभुता और अखंडता से जुड़े हैं, इसलिए ऐसे मामलों में जमानत देने से पहले अत्यधिक सावधानी बरतना आवश्यक है। याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं और जांच एजेंसियों की ओर से पेश सामग्री से प्रथम दृष्टया आरोपों का समर्थन होता है। अदालत ने यह भी कहा कि मामले के तथ्यों और याचिकाकर्ता के आचरण को देखते हुए उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह की एकल पीठ ने द्वारा शनिवार को पारित आदेश की कापी मंगलवार को जारी की गई में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं और जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत सामग्री से प्रथम दृष्टया आरोपों का समर्थन होता है। अदालत ने यह भी कहा कि मामले के तथ्यों और याचिकाकर्ता के आचरण को देखते हुए उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। मामले के अनुसार, हिसार सिविल लाइन थाना में 16 मई 2025 को दर्ज एफआईआर के तहत ज्योति रानी पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 की धाराओं 3, 4 और 5 तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 152 के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली थी कि ज्योति रानी, जो ‘ट्रैवल-विद-जो’ नाम से यूट्यूब चैनल चलाती है, पाकिस्तान की यात्रा के दौरान दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के एक अधिकारी के संपर्क में आई थी।

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गौरतलब है कि गिरफ्तारी के दौरान ज्योति मल्होत्रा के इंस्टाग्राम पर 1.33 लाख फॉलोअर्स थे। इसी तरह फेसबुक पर 3.21 लाख फॉलोअर्स और यूट्यूब पर करीब 4 लाख सब्सक्राइबर्स थे। वह पाकिस्तान की यात्रा पर भी गई थी। 2023 में ज्योति की मुलाकात पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारी एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से हुई और फिर ज्योति पाकिस्तान के जाल में फंस गई और जासूसी के आरोपों में पकड़ी गई। 17 मई 2025 को उसे गिरफ्तार किया गया था और वह तब से जेल में है।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उसे झूठा फंसाया गया है और वह केवल एक कंटेंट क्रिएटर है। उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है तथा वह जांच में सहयोग करने को तैयार है। हालांकि राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकार्ड से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और याचिकाकर्ता के खिलाफ पर्याप्त सामग्री मौजूद है। ऐसे में उसे जमानत देना उचित नहीं होगा।

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