सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। संदिग्ध मीथेन गैस विस्फोट के बाद सुरंग ढहने से अब तक 20 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है और सुरंग में फंसे अन्य लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
टनल हादसे में 20 मजदूरों की मौत की पुष्टि
पुलिस के अनुसार, नामची जिले में निर्माणाधीन सुरंग के भीतर हुए हादसे में फंसे 25 लोगों में से 20 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बचाव अभियान के दौरान अब तक 12 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें से सात की पहचान हो चुकी है। शेष शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों के अब भी सुरंग में फंसे होने की आशंका है, इसलिए कई एजेंसियां संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं।
मीथेन गैस विस्फोट को माना जा रहा हादसे की वजह
एनएचपीसी के प्रारंभिक बयान के अनुसार, सुरंग के भीतर चट्टानों में फंसी संदिग्ध मीथेन गैस के अचानक विस्फोट के कारण हादसा हुआ। विस्फोट के बाद घना धुआं और जहरीली गैस फैलने से स्थिति और गंभीर हो गई, जिसके चलते सुरंग का एक हिस्सा ढह गया। हादसे के सटीक कारणों की जांच अभी जारी है।

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक मजदूर के परिजनों को 4 लाख रुपये तथा घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने हादसे की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित करने का भी ऐलान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मुख्यमंत्री से फोन पर बात कर स्थिति की जानकारी ली और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की।
20 जुलाई को हुआ था हादसा
यह दुर्घटना 20 जुलाई 2026 को हुई थी। हादसे के बाद से राहत एवं बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। इस बीच सिक्किम विधानसभा ने मृतक मजदूरों को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा। हादसे ने निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों और गैस निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिक्किम टनल हादसा देश की हालिया सबसे दर्दनाक औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक बन गया है। राहत कार्य अभी जारी है और जांच एजेंसियां हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी हैं। सभी की निगाहें अब बचाव अभियान की प्रगति और जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।