Haryana: पोस्टल बैलेट पर EC का बड़ा ऐलान, विपक्ष ने किया स्वागत – पांच राज्यों में क्यों घटे आंकड़े?

Haryana: पोस्टल बैलेट पर EC का बड़ा ऐलान, विपक्ष ने किया स्वागत – पांच राज्यों में क्यों घटे आंकड़े?

Haryana: डाक मतपत्रों को लेकर निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा फैसला किया है। निर्वाचन आयोग ने निश्चित किया है कि मतों की गिनती के आखिरी राउंड से पहले हर हाल में डाक मत पत्रों की गिनती सुनिश्चित की जाएगी। बता दें कि डाक मत पत्रों की गिनती को लेकर राजनीतिक दलों में काफी विवाद रहता है और इनको लेकर कई बार अनेक मामले भी अदालतों में चलते हैं। डाक मत पत्रों की गिनती को लेकर निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए नई दिशा निर्देशों का विपक्ष ने भी स्वागत किया है। विपक्ष का स्वागत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में विभिन्न मुद्दों को लेकर निर्वाचन आयोग विपक्ष के निशाने पर है।

1990 के दशक में जब से चुनाव आयोग ने डाक मतपत्रों पर सम्पूर्ण डेटा प्रकाशित करना शुरू किया है, तब से लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों में इस सेवा का लाभ उठाने वाले मतदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। 1996 के लोकसभा चुनावों में 3.6 लाख डाक मतपत्र डाले गए थे। जो उस वर्ष डाले गए कुल मतों का केवल 0.1% था। जबकि 2024 में 42.82 लाख लोगों ने डाक द्वारा मतदान किया। जो कुल मतों का 0.66% है। ये संख्या आम चुनावों में डाक मतपत्रों का अब तक का सबसे बड़ा हिस्सा है।

अकेले 2019 और 2024 के बीच डाक मतपत्रों की संख्या में 53% की वृद्धि हुई। हालांकि सबसे ज्यादा वृद्धि 2014 और 2019 के बीच देखी गई। जब डाक मतपत्रों की संख्या में 143% की वृद्धि हुई, जो अब तक की सबसे ज्यादा वृद्धि है।

2024 के चुनावों में आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक 5.12 लाख डाक मतपत्र देखे गए। इसके बाद दूसरे नंबर पर राजस्थान में 3.76 लाख, जबकि तीसरे पर तमिलनाडु में 3.11 लाख, चौथे पर गुजरात में 3.08 लाख और पांचवें पर पश्चिम बंगाल में 2.93 लाख डाक मतपत्र रहे।
पांच राज्यों महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और बिहार को छोड़कर सभी में 2019 की तुलना में 2024 में डाक मतपत्रों की संख्या में वृद्धि देखी गई। तेलंगाना में डाक मतों की संख्या में सबसे बड़ी वृद्धि देखी गई। जो 2019 में 20,603 से 959% बढ़कर 2024 में 2.18 लाख हो गई। दूसरी ओर महाराष्ट्र में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। जो 2019 में 2.73 लाख से 2024 में 2.39 लाख तक 12% की गिरावट है।

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इसी तरह 2014 से 2019 तक केवल तीन राज्यों- गोवा, मिजोरम और त्रिपुरा में डाक मतपत्रों की संख्या में गिरावट देखी गई। इस अवधि में सबसे ज्यादा वृद्धि मणिपुर में दर्ज की गई, जहां डाक मतपत्रों में 2,081% की वृद्धि हुई। उसके बाद झारखंड में 1,435% और पंजाब में 1,434% की वृद्धि हुई।

2004 से जब चुनाव आयोग ने डाक मतदान का विस्तृत विवरण प्रकाशित करना शुरू किया, तब से आंकड़े दर्शाते हैं कि अस्वीकृत डाक मतपत्रों की संख्या पांच गुना से भी ज्यादा बढ़ गई है। लेकिन डाक मतपत्रों में उनकी हिस्सेदारी में काफी कमी आई है। 2004 में 95,459 डाक मतपत्र अस्वीकृत हुए। जो कुल डाक मतपत्रों का 15.77% था। 2024 में 5.36 लाख डाक मतपत्र अस्वीकृत हुए। लेकिन वे कुल डाक मतपत्रों का 12.51% थे। अपवाद 2009 था जब अस्वीकृत डाक मतपत्रों की हिस्सेदारी 21.54% के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी।

दर्ज की गई गिरावट

डाक मतपत्रों की संख्या में बढ़ोत्तरी बिहार सहित राज्य विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल रही है। ये बात इसलिए क्योंकि विभिन्न राज्यों में हाल ही में हुए दो विधानसभा चुनावों के दौरान केवल गुजरात और उत्तर प्रदेश में ही डाक मतपत्रों की हिस्सेदारी में गिरावट देखी गई है। 2020 और 2025 के बीच हुए विधानसभा चुनावों के सबसे हालिया सेट में अरुणाचल प्रदेश में डाक मतपत्रों का सबसे अधिक हिस्सा दर्ज किया गया। जो कुल मतों का 5.3% था। इसके बाद सिक्किम में 4.8%, गोवा में 2.81%, केरल में 2.77% और हिमाचल प्रदेश में 2.74% रहा।

बिहार में 1995 से 2005 तक लगातार तीन विधानसभा चुनावों में गिरावट के बाद हर चुनाव में डाक मतपत्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 1995 में 2,209 डाक मत डाले गए थे, जो कुल मतों का 0.01% था। 2020 तक डाक मतपत्रों की संख्या बढ़कर 2.68 लाख या कुल मतों का 0.63% हो गई। 2005 से 2010 के बीच डाक मतपत्रों की संख्या 2,896% बढ़कर, केवल 951 से 28,493 हो गई।

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