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Haryana News: हिसार में दलित युवक गणेश की मौत का मामला! इंसाफ के लिए 12 दिन लंबा संघर्ष

Satyakhabarindia

Haryana News: हिसार जिले में दलित युवक गणेश वाल्मीकि की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। यह मामला करीब 12 दिन तक गर्माया रहा जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला। परिवार इंसाफ की मांग को लेकर लगातार धरने पर बैठा रहा। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों की लापरवाही और अत्याचार से गणेश की जान गई है। इस दौरान परिवार का समर्थन करने के लिए समाज के विभिन्न वर्ग और राजनीतिक नेता भी धरने में शामिल हुए।

बड़े नेताओं का पहुंचना बना आंदोलन को ताकतवर

धरने को मजबूती तब मिली जब इसमें कई बड़े राजनीतिक चेहरे शामिल हुए। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सांसद कुमारी शैलजा और जयप्रकाश मौके पर पहुंचे। राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर इस घटना को संविधान और बाबा साहब अंबेडकर के सपनों की हत्या बताया। इन नेताओं ने इस घटना की सीबीआई जांच की मांग की और सरकार से जल्द कार्रवाई की अपील की। चरणजीत सिंह चन्नी ने स्पष्ट कहा कि दलित वर्ग गरीब जरूर है लेकिन कमजोर नहीं।

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मुख्यमंत्री से मिली पीड़ित परिवार की राहत

मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार हरकत में आई। केबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी और बवानीखेड़ा विधायक कपूर सिंह वाल्मीकि ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उनकी बातों को सुना। परिवार ने 5 मुख्य मांगें रखीं जिनमें दोषी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर, स्पेशल पोस्टमार्टम बोर्ड और परिवार को नौकरी देने की मांग प्रमुख थी। इसके बाद परिवार को चंडीगढ़ ले जाया गया जहां मुख्यमंत्री नायब सैनी से मुलाकात हुई।

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सभी मांगें मानी गईं, धरना हुआ समाप्त

मुख्यमंत्री नायब सैनी से मुलाकात के दौरान परिवार ने सभी दर्द और मांगें उनके सामने रखीं। मुख्यमंत्री ने तुरंत कार्रवाई करते हुए परिवार की सभी मांगों को स्वीकार किया। इसमें पुलिसकर्मियों पर एफआईआर, निष्पक्ष जांच के लिए विशेष बोर्ड और आर्थिक सहायता व सरकारी नौकरी की बात शामिल थी। इसके बाद परिवार ने अपनी संतुष्टि जताई और धरना समाप्त कर दिया।

अंतिम संस्कार के साथ शांत हुआ मामला

सरकार की तरफ से आश्वासन और कार्रवाई के बाद गणेश वाल्मीकि का आज अंतिम संस्कार किया गया। पूरे गांव में शोक और गुस्से का माहौल रहा लेकिन परिवार ने प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा जताया। यह मामला एक बार फिर यह याद दिलाता है कि समाज के कमजोर वर्गों को बराबरी और न्याय दिलाने के लिए सिर्फ नारे नहीं बल्कि ठोस कदम जरूरी हैं।

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