कांग्रेस को बड़ा झटका, कमल दीवान ने सोनीपत से चुनाव लड़ने से किया इनकार
दीपेंद्र हुड्डा और बीके हरिप्रसाद के फोन भी नहीं उठाए, उनका पहले विरोध कर चुके 6 लोगों को निगम पार्षद की टिकट देने से नाराज

सत्य खबर हरियाणा
Congress on Backfoot : हरियाणा में स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर सबसे पहले टिकट घोषित कर चर्चा में आई कांग्रेस अचानक बैकफुट पर चली गई है। कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी इस कदर हावी है कि कल नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद आज सोनीपत नगर निगम के लिए मेयर पद के कांग्रेस के उम्मीदवार कमल दीवान ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। सूत्र इसे कांग्रेस की अंदरूनी फूट का नतीजा मानते हैं।

सोनीपत से कांग्रेस के मेयर पद के उम्मीदवार कमल दीवान ने बुधवार को अपना नामांकन दाखिल किया था। इस दौरान रोहतक से सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, सोनीपत सांसद सतपाल ब्रह्मचारी और कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार पर जमकर निशाना साधा और साथ ही कांग्रेस ने हर वार्ड के लिए अलग-अलग घोषणा पत्र लाने का ऐलान भी किया था। हालांकि, अब कमल दीवान चुनाव से मुकर गए हैं।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस का दूसरा गुट ऐसे पार्षद प्रत्याशियों को टिकट दिलाने की पैरवी कर रहा है, जिन्होंने उपचुनाव में कांग्रेस के खिलाफ काम किया था। मेयर प्रत्याशी कमल दिवान उन्हें टिकट नहीं देना चाहते हैं। फिलहाल, उन्हें मनाने की कोशिशें हो रही हैं। सूत्र बताते हैं कि कमल दीवान ने कांग्रेस के बड़े नेताओं के फोन उठाना भी बंद कर दिया है। उन्होंने इस दौरान ने तो दीपेंद्र सिंह हुड्डा का फोन उठाया और ना ही हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद का फोन उठाया।
बताते हैं कि सोनीपत नगर निगम पार्षद पद के लिए 6 उम्मीदवारों को लेकर यह लड़ाई शुरू हुई है। कमल दीवान का कहना है कि इन लोगों ने उपचुनाव के समय उनका विरोध किया था और आज कांग्रेस का ही एक गुट इन लोगों को टिकट देने पर अड़ा हुआ है।
निगम पार्षद के लिए छह नेताओं की टिकट के लिए प्रयास कर रहे कांग्रेस के ही एक गुट के लोगों को इस बात का आभास भी नहीं था कि उनके अड़ने का इतना बड़ा असर पड़ सकता है। कमल दीवान ने एक झटके में चुनाव लड़ने से इनकार करके कांग्रेस को बैकफुट पर धकेल दिया है। कांग्रेस अभी तक मजबूती के साथ चुनाव लड़ती हुई नजर आ रही थी लेकिन सोनीपत की इस उठा पटक की राजनीति में कांग्रेस को सोचने पर मजबूर किया है।
प्रदेश की राजनीति पर नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि इस घटनाक्रम से कांग्रेस के पूरे चुनाव प्रचार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। अब तक कांग्रेस एकता के साथ चुनाव मैदान में उतरने की बात करती रही है। कल दीपेंद्र हुड्डा ने भी भीतरघात से बचने को कहा था लेकिन उसे समय उन्हें भी इस बात का आवास नहीं था कि इतना बड़ा खेल भी यहां हो सकता है।
आज सुबह से इस बात की उम्मीद की जा रही थी लेकिन यह भी माना जाता था कि खबर के सार्वजनिक होने से पहले कांग्रेस कमल दीवान को मनाने में सफल हो जाएगी। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि कमल दीवान पुराने कांग्रेसी परिवार से हैं। लेकिन खबर के सार्वजनिक होने के बाद ही अब इस मामले में कांग्रेस को फूंक-फूंककर कदम रखना होगा।
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