NIT कुरुक्षेत्र में छात्रों द्वारा लगातार की जा रही आत्महत्या पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग सख्त, मांगी रिपोर्ट
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय अलग से कर रहा है जांच, दूसरी बार पहुंची टीम

सत्य खबर हरियाणा
NIT Students Suicide Case : हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र में छात्रों की लगातार आत्महत्या और प्रयासों की घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान प्रशासन, जिला प्रशासन और पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। एनआईटी में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की गतिविधियां भी लगातार तेज हो गई है। इस मामले में आज दूसरी बार केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की टीम जांच के लिए एनआईटी पहुंची। जांच टीम दो दिन यहां रुकेगी और सभी मामलों को दोबारा खुलवाएगी। इससे पहले 7 अप्रैल को एनआईटी की चेयरपर्सन तेजस्विनी अनंत कुमार के नेतृत्व में तीन सदस्य टीम पहुंची थी। तब टीम ने मैराथन बैठक कर 12 बिंदुओं पर पड़ताल की थी।

कुरुक्षेत्र स्थित संस्थान में लगातार हो रही आत्महत्याओं ने पूरा सिस्टम हिलाकर रख दिया है। इस मामले में एनआईटी प्रशासन को मजबूरन छात्रों की छुट्टियां करनी पड़ेगी और हॉस्टल भी खाली करवाना पड़ा था। कुछ दिन पहले संस्थान में जहां पूरी तरह से चल पल के वर्तमान में यहां पर सन्नाटा छाया हुआ है। पहली बार जब टीम आई थी तो यहां पर चहल-पहल थी लेकिन और पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ था।
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता में गठित पूर्ण पीठ ने हालिया घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। जानकारी के अनुसार, 18 अप्रैल को एक प्रथम वर्ष के छात्र ने हॉस्टल की पांचवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया, जिसे समय रहते बचा लिया गया। इससे पहले 16 अप्रैल को एक द्वितीय वर्ष के छात्र का शव उसके हॉस्टल कमरे में मिला था। फरवरी और मार्च में भी दो छात्रों की मौत के मामले सामने आए हैं, जिससे संस्थान में छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आयोग का मानना है कि अब तक संस्थान द्वारा उठाए गए कदम, जैसे दो प्रोफेसरों का स्थानांतरण, पर्याप्त और प्रभावी नहीं हैं। यह स्थिति मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, काउंसलिंग, निगरानी तंत्र और संकट प्रबंधन में गंभीर कमियों की ओर इशारा करती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक और शारीरिक कल्याण को सुनिश्चित करना भी है।
इसी संदर्भ में आयोग ने एनआईटी निदेशक से आत्महत्या घटनाओं की परिस्थितियों, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा उपायों, मेंटर-मेंटी प्रणाली और हॉस्टल खाली कराने के आदेशों के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। वहीं, उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक कुरुक्षेत्र से भी जांच, सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट तलब की गई है।
असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा के अनुसार, सभी संबंधित अधिकारियों को 19 मई 2026 की सुनवाई से एक सप्ताह पहले अपनी रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
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