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मानव संसाधन विभाग के महानिदेशक ग्रुप डी कर्मियों के लिए नियुक्तिकर्ता प्राधिकरण घोषित

मानव संसाधन विभाग के महानिदेशक ग्रुप डी कर्मियों के लिए नियुक्तिकर्ता प्राधिकरण घोषित

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हरियाणा सरकार ने ग्रुप-डी कर्मचारियों से जुड़े मामलों को तेज़ और पारदर्शी ढंग से निपटाने के लिए एक बड़ी प्रशासनिक पहल की है। सरकार की इस पहल से ग्रुप डी के कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। अभी तक अपने मामलों को लेकर ग्रुप डी के कर्मचारी दर-दर की ठोकर खाने का मजबूर थे लेकिन सरकार के इस नए नियम से इन कर्मचारियों को एक ही खिड़की पर अपनी सभी समस्याओं का समाधान मिल सकेगा।

हरियाणा ग्रुप-डी कर्मचारी (भर्ती एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 2018 और हरियाणा सरकारी राजपत्र (21 दिसंबर, 2023) के आधार पर जारी नए निर्देशों के तहत अब मानव संसाधन विभाग के महानिदेशक को नियुक्तिकर्ता प्राधिकरण घोषित किया गया है।
यानी ग्रुप-डी कर्मियों की नियुक्ति, त्यागपत्र, स्थानांतरण और अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण निर्णय अब इसी प्राधिकरण से होकर गुजरेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मानवीय आधार पर नियुक्ति के सभी प्रकरणों की जांच हरियाणा मानवीय आर्थिक सहायता अथवा नियुक्ति नियम, 2019 के अनुसार की जाएगी। हर केस का सत्यापन एचएसएएस (हरियाणा प्रशासनिक सेवा) कैडर के अधिकारी द्वारा किया जाएगा।

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साथ ही, संबंधित विभागाध्यक्ष की विस्तृत सिफारिश भी आवश्यक होगी। सरकार ने कहा है कि बिना समुचित दस्तावेज़ और तस्दीक के कोई भी मानवीय आधार पर नियुक्ति का मामला आगे नहीं भेजा जाएगा। 28 मार्च, 2018 या उसके बाद नियुक्त हुए सभी कॉमन कैडर ग्रुप-डी कर्मचारियों के त्यागपत्र वाले प्रकरणों को नियंत्रण अधिकारी या विभाग के माध्यम से सीधे मानव संसाधन विभाग तक भेजा जाएगा। सरकार ने चेतावनी दी है कि अनावश्यक देरी वाले मामलों की जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय पर तय होगी।

 

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अनुशासनात्मक मामलों में संपूर्ण रिकॉर्ड अनिवार्य

अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े मामलों में सरकार ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि कि मामले का पूरा दस्‍तावेज़ी रिकॉर्ड, तथ्यात्मक रिपोर्ट तथा विभागीय टिप्पणियां और सुझाव सभी अनिवार्य रूप से संलग्न किए जाएं। सरकार ने साफ कहा है कि बिना पूर्ण रिकॉर्ड के अनुशासनात्मक प्रकरण किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

विभागों को सख्त हिदायत जारी

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पत्र में सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि इन नए नियमों को पत्र और भावना दोनों रूपों में लागू किया जाए। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था ग्रुप-डी कर्मचारियों से जुड़े मामलों को एक समान, पारदर्शी और तेज़ गति से निपटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और पूरे राज्य में समान प्रक्रिया लागू करने में मदद करेगी।

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