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200 साल पुराने मंदिर का 108 फीट ऊंचा गुंबद ढहा, सेवादार बाबा नटराजन गिरी की मौत

20 साल पहले चंदा इकट्ठा कर मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार कराया गया था, ग्रामीणों ने खुद ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया

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सत्य खबर हरियाणा

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Temple Dome Collapse : कुरुक्षेत्र के बाबैन का प्राचीन शिवालय मंदिर का 108 फुट ऊँचा गुंबद रविवार सुबह करीब 4 बजे अचानक ढ़ह गया। मंदिर के गुंबद के मलबे में दबने से मंदिर में सेवा कर रहे बाबा नटराजन गिरी की दुखद मौत हो गई। मंदिर को उप ज्योतिर्लिंग नागेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर की गगनचुंबी गुंबद रविवार तड़के अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। लगभग 108 फुट ऊंचे इस विशालकाय ढांचे के गिरने से मंदिर का मुख्य हिस्सा मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। लोगों में बाबा नटराजन गिरी की मौत का गहरा दुख है।

इस प्राचीन मंदिर में स्थापित शिवलिंग को ‘स्वयंभू’ (प्राकृतिक रूप से प्रकट) माना जाता है, जिसकी वजह से इसकी महत्ता उप-ज्योतिर्लिंग के रूप में है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब 20 साल पहले स्थानीय स्तर पर चंदा इकट्ठा कर मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार कराया गया था। बताया जा रहा है कि इतनी ऊंची गुंबद का पूरा ढांचा महज चार इंच मोटी दीवार के सहारे टिका हुआ था, जो समय के साथ कमजोर हो गई।

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प्रत्यक्षदर्शियों और मंदिर के पुजारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, मूल रूप से साधु संत परंपरा से जुड़े सेवादार नटराजन गिरी रोज की तरह मंदिर की बाहरी दीवार के साथ सटी अपनी चारपाई पर सो रहे थे। सुबह करीब 4 बजे, जब आसमान में हल्की भोर फूट रही थी, तभी अचानक एक भयानक गड़गड़ाहट के साथ मंदिर की विशालकाय गुंबद नीचे आ गिरी। धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास के घरों में सो रहे लोग भूकंप के डर से बाहर भाग खड़े हुए। मुख्य पुजारी और अन्य सेवादार जब दौड़कर मौके पर पहुंचे, तो वहां धूल का गुबार और मलबे का पहाड़ था, जिसके नीचे नटराजन गिरी दब चुके थे।

मंदिर के गर्भगृह को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे शिवलिंग और मूर्तियां मलबे के नीचे दब गई हैं। चीख-पुकार सुनकर आसपास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण लाठी-डंडे और फावड़े लेकर मंदिर की तरफ दौड़े। बिना किसी प्रशासनिक मदद का इंतजार किए, ग्रामीणों ने खुद ही मलबा हटाने का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कंक्रीट और भारी पत्थरों को हटाकर जब तक नटराजन गिरी को बाहर निकाला गया, तब तक उनके प्राण पखेरू उड़ चुके थे।

गुंबद के ऊपरी हिस्से के लोहे और कंक्रीट के गर्डर सीधे गर्भगृह की छत को तोड़ते हुए अंदर जा गिरे, जिससे पवित्र शिवलिंग और सदियों पुरानी मूर्तियां मलबे के नीचे छिप गई हैं। अभी भी मंदिर के भीतर टनों मलबा जमा है। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष प्रतिनिधि कैलाश सैनी भी तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित पक्ष और ग्रामीणों को ढांढस बंधाया और कहा कि सरकार इस प्राचीन धरोहर के पुनर्निर्माण और नुकसान के आकलन के लिए हर संभव कदम उठाएगी। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है।

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