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आपकी बेटी हमारी बेटी योजना में 17.30 करोड़ का घोटाला CAG की रिपोर्ट के बाद 6.79 करोड़ की हुई वसूली

आपकी बेटी हमारी बेटी योजना में 17.30 करोड़ का घोटाला CAG की रिपोर्ट के बाद 6.79 करोड़ की हुई वसूली

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आपकी बेटी हमारी बेटी योजना में कैग द्वारा बड़े घोटाले का पर्दाफाश करने के बावजूद अब तक विभाग इस मामले में आधे से ज्यादा रिकवरी कर पाने में विफल रहा है। इस मामले में बताया गया है कि 7723 लाभार्थियों को एक से ज्यादा बार पंजीकृत किया गया और कुछ ऐसे भी लाभार्थी है जिन्हें 9 बार पंजीकृत कर दिया गया। इन मामलों में 17.30 करोड़ रुपए का सरकार को नुकसान हुआ है और इस मामले में अब तक 1966 मामलों में 6.79 करोड रुपए की वसूली की जा चुकी है।

क्या है आपकी बेटी हमारी बेटी योजना

“आपकी बेटी हमारी बेटी” हरियाणा सरकार की एक योजना है, जिसका उद्देश्य बालिका के जन्म के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सुधार लाना और बाल-लिंग अनुपात को बढ़ाना है। इस योजना के तहत, अनुसूचित जाति/बीपीएल परिवारों की पहली बेटी और किसी भी जाति के परिवार की दूसरी बेटी के नाम पर ₹21,000 का निवेश एलआईसी में किया जाता है, जो बेटी के 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर उसे मिलता है। योजना का लाभ केवल उन्हीं को मिलेगा जो अनुसूचित जाति या बीपीएल परिवारों की पहली बेटी, जिसका जन्म 22 जनवरी, 2015 को या उसके बाद हुआ हो। किसी भी जाति के परिवार की दूसरी बेटी, जिसका जन्म 22 जनवरी, 2015 को या उसके बाद हुआ हो। लाभार्थी हरियाणा के निवासी या मूल निवासी होना चाहिए। योजना में पहली बेटी या दूसरी बेटी के जन्म पर ₹21,000 का एकमुश्त निवेश एलआईसी में किया जाता है। यह राशि बालिका के 18 साल की होने पर उसे दी जाती है।

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कैग ने योजना में क्या पाया?

अक्टूबर 2022 में सोनीपत के DPO कार्यालय और नवंबर 2022 में जींद के जुलाना WCDPO कार्यालय के रिकॉर्ड की जांच के दौरान, कैग ने पाया कि विभाग ने एकमुश्त 21,000 रुपये की राशि कई लाभार्थियों के नाम पर बार-बार एलआईसी में जमा कराई। इसके बाद महिला एवं बाल विकास महानिदेशक (DG WCD) कार्यालय से अन्य जिलों का एलआईसी डेटा भी मंगाया गया। जांच में पाया गया कि जनवरी 2015 से जुलाई 2022 तक 3,60,188 बेटियों को योजना के तहत पंजीकृत किया गया और एलआईसी को कुल 756.39 करोड़ रुपये (प्रत्येक लाभार्थी पर 21,000 रुपये) का प्रीमियम भुगतान किया गया।

कैसे हुआ खुलासा

जब डेटा पर डुप्लीकेट फ़िल्टर (नाम, जन्म तिथि, पिता और माता का नाम) लगाया गया तो सामने आया कि 7,723 लाभार्थियों का पंजीकरण एक से अधिक बार हुआ है।“ इस प्रकार, 8,238 मामलों में एलआईसी प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिससे 7,723 लाभार्थियों को 17.30 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का भुगतान हुआ,” कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा। कैग ने पाया कि योजना की प्रक्रियाएं स्वचालित (automated) नहीं थीं। लाभार्थियों की सूची बनाना, कोषागार से धन निकालना और सूची एलआईसी को भेजना, सब काम मैन्युअली किया जा रहा था। रिपोर्ट में कहा गया, “ इसलिए आवेदन की स्वीकृति और धनराशि जारी करने की प्रक्रिया के दौरान डुप्लीकेट लाभार्थियों की पहचान और उन्हें हटाने का कोई तंत्र उपलब्ध नहीं था।”

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कैग की सिफारिश

कैग ने सिफारिश की है कि राज्य सरकार को अतिरिक्त भुगतान की गई राशि की वसूली करनी चाहिए और पोर्टल की खामियों को दूर करके भविष्य में लाभार्थियों के डुप्लीकेट पंजीकरण को रोकना चाहिए।

विभाग ने क्या किया?

जुलाई 2023 में विभाग ने कैग के समक्ष तथ्यों को स्वीकारते हुए बताया कि उसने एलआईसी से 836 मामलों में 2.09 करोड़ रुपये की वसूली की है और शेष राशि की वसूली के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सितंबर 2024 तक विभाग ने बताया कि उसने 1,966 मामलों में 6.79 करोड़ रुपये की वसूली की है, हालांकि पूरी जानकारी नहीं दी गई। कैग रिपोर्ट में कहा गया, “इस प्रकार, आवेदन की प्रक्रिया के दौरान डुप्लीकेट लाभार्थियों की पहचान और उन्हें हटाने की व्यवस्था न होने के कारण, 7,402 लाभार्थियों को कई बार लाभ मिल गया, जिससे एलआईसी को 15.54 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का भुगतान हुआ। यह मामला मार्च 2023 में सरकार को जवाब/टिप्पणी के लिए भेजा गया था, लेकिन जनवरी 2025 तक सरकार का जवाब नहीं मिला।”

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आगे क्या

विभाग अब इस मामले में आगे इन फर्जी आवेदकों को और योजना का लाभ एक से ज्यादा बार लेने वाले लाभार्थियों से पैसा वसूली करने का अभियान चला रही है। विभाग का कहना है कि इस पैसे के वसूली में काफी समय लग रहा है क्योंकि जिन लोगों ने यह पैसा लिया है वह पैसा देने को इतनी आसानी से तैयार नहीं हो रहे हैं।

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