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हरियाणा में नहीं बढ़ेंगे बिजली के दाम, आयोग ने सुनाया फैसला

बिजली कंपनियां देती रही घाटे की दुहाई, नहीं पसीजा आयोग का दिल

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

Electricity Rate : हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। वित्त वर्ष 2026–27 में बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे करीब 83.80 लाख उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा। नया टैरिफ एक अप्रैल से लागू होगा।
बिजली कंपनियों ने हजारों करोड़ रुपये के घाटे की बात कही थी, बिजली कंपनियां 15% रेट बढ़ाने की मांग कर रही थी। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग ने दरें नहीं बढ़ाने का आज फैसला सुनाया।
आयोग ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVNL) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVNL) की ओर से दायर वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई के बाद अपना निर्णय सुनाया है।
दोनों डिस्कॉम्स ने लगभग 4,484.71 करोड़ रुपए के राजस्व घाटे का अनुमान प्रस्तुत किया था, इसके बावजूद आयोग ने उपभोक्ताओं पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त बोझ नहीं डालने का फैसला किया।

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25 मार्च को इस टैरिफ आदेश पर हस्ताक्षर हुए

जनसुनवाई के दौरान सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं ने बिजली दरों में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं करने की बात कही थी। इसी को देखते हुए आयोग ने रेवेन्यू कलेक्शन में सुधार, बकाया प्रबंधन, बिजली खरीद के अनुकूलन और हानियों में कमी पर जोर देते हुए एआरआर को राजस्व-न्यूट्रल रखा है। एचईआरसी के अध्यक्ष नंद लाल शर्मा और मेंबर मुकेश गर्ग, शिव कुमार ने 25 मार्च को इस टैरिफ आदेश पर हस्ताक्षर किए। आदेश जारी करने से पहले आयोग ने व्यापक परामर्श प्रक्रिया अपनाई।
8 जनवरी को पंचकूला स्थित एचईआरसी कोर्ट रूम में जनसुनवाई आयोजित की गई, इसके बाद गुरुग्राम, पानीपत, हिसार और यमुनानगर में फील्ड हियरिंग्स की गईं, जहां उपभोक्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए गए थे।

HPPC के पुनर्गठन पर जोर

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आयोग ने बिजली क्षेत्र में सुधार के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए हैं। हरियाणा पावर परचेज सेंटर (HPPC) के पुनर्गठन पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि बिजली खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और किफायती बन सके।
साथ ही, डिमांड साइड मैनेजमेंट (DSM) उपायों के माध्यम से मांग में उतार-चढ़ाव को संतुलित करने पर भी जोर दिया गया है। वर्तमान में अधिकतम और न्यूनतम मांग के बीच लगभग 3,000 से 5,000 मेगावाट का अंतर है।
लोगों ने भी जनसुनवाई में साफ कहा था कि बिल नहीं बढ़ना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया गया। अब कंपनियों को अपने खर्च और वसूली में सुधार करना होगा।

किसानों और उपभोक्ताओं को अलग-अलग राहत

किसानों के लिए बिजली पर भारी सब्सिडी जारी रहेगी। असली लागत ज्यादा होने के बावजूद किसानों को बहुत कम दर पर बिजली मिलती रहेगी। ट्यूबवेल कनेक्शन वालों को लोड बढ़ाने का एक मौका भी दिया गया है।

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