ताजा समाचार

Punjab: गुरदासपुर का अनोखा नज़ारा, ब्यास नदी में बहकर पहुँचा दुर्लभ पैंगोलिन, ग्रामीण हुए हैरान

Satyakhabarindia

Punjab इस समय आपदा से गुजर रहा है लेकिन कई बार आपदा के बीच कुछ ऐसी घटनाएं हो जाती हैं जो जीवन भर याद रहती हैं। ऐसे ही एक मामले में व्यास नदी में बहकर एक दुर्लभ पैंगोलिन गुरदासपुर जिले के भैणी खादर गांव में पहुंच गया।

यूं तो यहां लोग बाढ़ से पीड़ित हैं और दुखी है लेकिन इस दुर्लभ पैंगोलिन को देखने के लिए लोगों का हजूम उमड़ पड़ा और बाद में उन्होंने वाइल्ड लाइफ के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। बताते हैं कि जब यह दुर्लभ प्रजाति का पैंगोलिन ग्रामीणों को दिखाई दिया तो एक बार तो ग्रामीणों को डर भी लगा क्योंकि यह जानवर इन्होंने पहले कभी नहीं देखा था लेकिन फिर भी ग्रामीणों ने हिम्मत करके उसे काबू कर पिंजरे में डाल लिया। लोगों को उसे समय यह भी नहीं पता था कि इस जानवर का क्या नाम है? बाद में कुछ लोगों ने इंटरनेट की मदद से इसका पता लगाया और वाइल्डलाइफ अधिकारियों को इसकी सूचना भिजवाई। जब लोगों को एक अजीब जानवर के पकड़े जाने की सूचना मिली तो गांव के लोग मौके पर जुटने लगे।

मंडियों का दौरा करके किसानों की समस्याओं को उठाएगी जेजेपी : डॉ अजय सिंह चौटाला

Punjab: गुरदासपुर का अनोखा नज़ारा, ब्यास नदी में बहकर पहुँचा दुर्लभ पैंगोलिन, ग्रामीण हुए हैरान

नदियों के उफान और बाढ़ ने जहां लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी है, वहीं इस दौरान कई हैरान करने वाले ऐसे नजारे ही हैं कि कुछ समय के लिए उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है और साथ ही ऐसी घटनाएं लोगों को संघर्ष करने की भी प्रेरणा देती हैं।

कांग्रेस और इनेलो का एजेंडा हमेशा वोट लो और शोषण करो : नायब सैनी

वाइल्डलाइफ पठानकोट के इंचार्ज परमजीत सिंह मौके पर पहुंचे और उन्होंने पैंगोलिन को सुरक्षित नदी किनारे जंगल में छोड़ दिया। इस अनोखे जीव को देखने के लिए इलाके के लोग दूर-दराज़ से पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक पैंगोलिन एक दुर्लभ प्रजाति का जीव है, जो ज़्यादातर रात में सक्रिय रहता है और अपनी सुरक्षा के लिए गोल होकर बैठ जाता है। पंजाब में इसे देखना बेहद कम होता है। लोगों का कहना है कि बाढ़ और भारी बारिश के कारण कई जंगली जीव अपने ठिकानों से बाहर निकलकर गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं।

राजनीति की भेंट चढ़ा भगवान परशुराम भवन का शिलान्यास कार्यक्रम, जमकर लात-घूंसे चले

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button