अहीरवाल में राव नरबीर सिंह दे रहे हैं राव इंद्रजीत सिंह को कड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री को गुरुग्राम से चुनाव लड़ने का आह्वान कर एक तीर से दो निशाने साधे राव नरबीर ने

सत्य खबर हरियाणा
Ahirwal politics : प्रदेश के अहीरवाल क्षेत्र में राव नरबीर सिंह अब केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह को कड़ी चुनौती देते हुए नजर आते हैं। रविवार को सेक्टर 91 स्थित कांकरोला गांव में आयोजित रैली को सफल बना कर हरियाणा के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह ने पहली अग्नि परीक्षा पास कर ली है और शक्ति प्रदर्शन में वह सफल रहे हैं।
दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव इंद्रजीत सिंह और राव नरबीर के बीच राजनीतिक लड़ाई कोई नई नहीं है। 2019 के चुनाव में कुछ नेताओं ने भाजपा की टिकट पाने के लिए राव नरबीर सिंह का हाथ पकड़ा, परंतु राव इंद्रजीत सिंह ने राव नरबीर को ही चुनावी दौड़ से बाहर कर दिया था। 2024 में वापसी के बाद एक बार फिर राव नरबीर सिंह अपनी पुरानी फॉर्म में दिखे हैं।
अहीरवाल की राजनीति में अब तक राव इंद्रजीत सिंह का दबदबा रहा है। दक्षिणी हरियाणा में 2014 से पहले कांग्रेस और 2014 के बाद भाजपा की राजनीति राव इंद्रजीत सिंह के इर्दगिर्द घूमती रही है। 75 पार हो चुके राव इंद्रजीत सिंह को समय-समय पर राव नरबीर से चुनौती मिलती रही है।
वर्तमान में दोनों नेताओं के बीच लड़ाई इस बात की है कि 2029 के चुनाव में दक्षिणी हरियाणा में भाजपा की अगुवाई कौन करेगा? दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में दोनों दिग्ग्जों के बीच खुब जुबानी जंग चली थी। भ्रष्टाचार पर शुरू हुआ वाकयुद्ध राजनीतिक हार जीत तक पहुंच गया था। राव इंद्रजीत सिंह ने राव नरबीर को 2009 में मिली हार याद दिलाई थी तो राव नरबीर ने राव इंद्रजीत सिंह को 1987 में जाटुसाना में मिली हार की याद करवाई थी।
1987 में राव इंद्रजीत सिंह को हराकर राजनीति की शुरूआत करने वाले राव नरबीर सिंह भले ही समय-समय पर राव इंद्रजीत सिंह को चुनौती देते रहे हों। राजनीतिक ताकत के मामले में राव इंद्रजीत सिंह हमेशा भारी पड़े हैं। वर्तमान में भी उन्हें कमजोर नहीं आंका जा सकता। अहीरवाल के विधायकों में एक बड़ी संख्या उन लोगों की है, जो राव इंद्रजीत सिंह को अपना नेता मानते हैं। यह सही है कि उनके विरोधी लोगों की संख्या अब बढ़ने लगी है लेकिन उनके पास अभी ज्यादा ताकत नहीं है।
इस सफल रैली में राव नरबीर सिंह ने मुख्यमंत्री को गुरुग्राम से चुनाव लड़ने का आह्वान करके इस बात का संकेत दे दिया कि वह अहीरवाल से मुख्यमंत्री बनाने के लिए कितने उत्सुक हैं। राव नरबीर सिंह ने इस प्रयास से एक तीर से दो निशाने साधे हैं एक और जहां उन्होंने अहीरवाल के विकास के लिए मुख्यमंत्री को सीधे-सीधे नेता दिया है वहीं दूसरी ओर उन्होंने राव इंद्रजीत सिंह के खिलाफ मजबूत मोर्चा खोला है।
इस रैली की सफलता से राव नरबीर सिंह काफी उत्साहित हैं। भले ही आज उनका कद राव इंद्रजीत सिंह के मुकाबले में कुछ कम आंका जाता हो, लेकिन उन्होंने संकेत दे दिया है कि वह राव इंद्रजीत सिंह की सरदारी में कभी नहीं आने वाले।
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