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जींद जिले के गांव रधाना की महिलाओं ने एलपीजी को कहा अलविदा

जब तक एलजी संकट चलेगा तब तक पारंपरिक चूल्हे पर खाना बनाएंगी महिलाएं, दर्जनों महिलाओं ने पंचायत कर लिया फैसला

Satyakhabarindia

 

 

सत्य खबर हरियाणा

Haryana News : जींद जिले के गांव रधाना की महिलाओं ने एक पंचायत कर एलपीजी संकट को ध्यान में रखते हुए चूल्हा फूंकने का फैसला किया है। महिलाओं का कहना है कि वह जब तक गैस संकट खत्म नहीं होगा तब तक चूल्हे पर खाना बनाकर काम चलाएंगी। महिलाओं में इस मुहिम की आज शुरुआत कर दी। महिलाओं ने एलपीजी संकट समाप्त होने तक रसोई गैस सिलेंडर को अलविदा कहने का फैसला किया है। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी रसोई गैस की समस्या नहीं होने का दावा करते हैं लेकिन महिलाओं का कहना है कि उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है जिस कारण वह चूल्हा जलाने पर मजबूर हुई हैं और अब उन्होंने रसोई गैस का छोड़ चूल्हे पर ध्यान देने का फैसला करना पड़ा है।

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आज सुबह गांव की दर्जनों महिलाएं एकत्रित हुई और उन्होंने कहा कि जब तक गैस की समस्या दूर नहीं होगी वह अपने पारंपरिक चूल्हों पर खाना बनाकर काम चलाने का काम करेंगी। इन महिलाओं में विमला देवी, कमलेश देवी, भतेरी, सरोज, राजबाला, मूर्ति देवी, कमला, संगीता, मोनिया आदि प्रमुख रूप से शामिल थीं।

विमला देवी ने कहा कि पुरानी महिलाएं तो फिर भी चूल्हे पर खाना बना लेती हैं लेकिन आजकल की बहू बेटियों को चूल्हे में आग जलाना भी नहीं आता है। उन्होंने कहा कि चूल्हे पर खाना बनाने में बहुत से दिक्कतें हैं, लेकिन वर्तमान में उनके पास इसके अलावा कोई इलाज नहीं है। विमला देवी ने कहा कि आज महिलाओं ने फैसला किया है कि गांव की बड़ी बुजुर्ग महिलाएं बहू बेटियों को चूल्हा जलाना भी सिखाएंगी।

गांव की बहु संगीता ने कहा कि चूल्हा जलाने में दिक्कत बहुत हैं क्योंकि इससे जो धूंआ होता है, उससे मैं केवल महिलाओं बल्कि बच्चों और बुजुर्गों को भी आंखों में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि एक और तो सरकार उज्ज्वला योजना बनाकर 500 रुपए में सिलेंडर उपलब्ध करवाने की बात करती है दूसरी ओर महिलाओं को समय पर सिलेंडर मिल ही नहीं पा रहा है।

गांव की महिला कमला ने कहा कि सुबह सभी लोगों का काम पर जाने का समय होता है और बच्चों को भी स्कूल जाना होता है लेकिन चूल्हे के कारण महिलाएं बच्चों को समय पर खाना बनाकर देने में खुद को असहाय महसूस कर रही हैं। उनका कहना है कि उनकी सरकार से मांग है कि सरकार समय पर गैस उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करे।

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गांव की बेटी मोनिया ने कहा कि जब से रसोई गैस आई है तब से महिलाओं ने चूल्हा जलाना बंद कर दिया था। कुछ घरों में चूल्हा जलता था लेकिन उन घरों में भी रसोई गैस पर ज्यादा काम होता था। लेकिन अब जब गैस नहीं मिल रही है तो महिलाओं ने मजबूर होकर इस बात का फैसला किया है कि वह रसोई गैस के लिए लाइन में लगने की बजाय अपने चूल्हे के लिए ईंधन जुटाने का काम करेंगी और बच्चों को समय पर खाना बनाकर देने का प्रयास करेंगी।

भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष और गांव रधाना निवासी सुनील चहल बताते हैं कि करीब 20 दिन से लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि एक-एक सिलेंडर के लिए तीन-तीन, चार-चार दिन लाइन में लगना पड़ता है और उसके बाद भी जरूरी नहीं है कि सिलेंडर मिल जाए। उन्होंने कहा कि गांव की महिलाओं ने देशहित में चूल्हे पर खाना बनाने का फैसला किया है।

गांव के देवेंद्र कहते हैं कि वर्तमान में पैदा हुए गैस और तेल के संकट को लेकर सरकार जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि गैस और तेल खाड़ी देशों से आता है और वहां पर युद्ध के चलते यह संकट पैदा हुआ है। ऐसे देश के हर नागरिक का फर्ज है कि वह इस संकट में सरकार के साथ खड़ा हो। उन्होंने कहा कि गांव की महिलाओं ने जो फैसला लिया है वह सराहनीय है।

 

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