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वंदे मातरम् के 150 वर्ष: भारत की आत्मा का स्वर, राष्ट्रभक्ति का प्रतीक

Satyakhabarindia

आज देशभर में भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार ने “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है।” उन्होंने देशवासियों से अपील की कि सभी लोग इस महान गीत के पूर्ण संस्करण का सामूहिक गान करें, ताकि यह प्रेरणा भावी पीढ़ियों तक पहुँच सके।

अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ‘वंदे मातरम्’ ने आज़ादी की लड़ाई में एक अद्वितीय भूमिका निभाई थी। इस गीत ने उस दौर में गुलाम भारतवासियों के भीतर आत्मसम्मान, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की भावना जगाई थी। अंग्रेज़ों की हुकूमत के खिलाफ इस गीत ने भारतीयों को एक सूत्र में बांध दिया था। उन्होंने कहा कि यह गीत आज भी युवाओं में राष्ट्रवाद, एकता और नवऊर्जा का स्रोत बना हुआ है।

देशभर में 150 स्थानों पर कार्यक्रम

केंद्र सरकार और बीजेपी ने इस अवसर को “राष्ट्र एकता का उत्सव” के रूप में मनाने का फैसला किया है। इस पहल के तहत पूरे देश में 150 स्थानों पर सामूहिक वंदे मातरम् गायन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल में इसे विशेष महत्व दिया जा रहा है — वहां 7 नवंबर को ही 1100 जगहों पर सामूहिक गायन का आयोजन किया गया है।
बंगाल में होने वाला यह उत्सव आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सांस्कृतिक एकता और भारतीय अस्मिता के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, कुछ स्थानों पर इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विरोध भी दर्ज किया गया है।

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केंद्र सरकार का निर्णय और उद्देश्य

1 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर देशव्यापी उत्सव मनाया जाएगा।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों में राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

इस अभियान के तहत देशभर के शैक्षणिक संस्थानों, सांस्कृतिक मंचों और सामाजिक संगठनों को भी जोड़ा गया है। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में “वंदे मातरम् दिवस” के अवसर पर विशेष सभाएँ आयोजित की जा रही हैं, जिनमें विद्यार्थी इस गीत का सामूहिक गान कर रहे हैं।

वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व

“वंदे मातरम्” गीत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में लिखा था, जो बाद में उनकी प्रसिद्ध कृति ‘आनंदमठ’ का हिस्सा बना। यह गीत आज़ादी की लड़ाई में क्रांतिकारियों का युद्धघोष बन गया। इस गीत के “माँ” स्वरूप भारतमाता का चित्रण देशवासियों में मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक बन गया।

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अमित शाह का संदेश

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “वंदे मातरम् वह गीत है जिसने भारतवासियों में आज़ादी की चेतना को प्रज्वलित किया और आज भी यह हमें एकता, साहस और राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरित करता है। इस अवसर पर हमें अपने परिवार और समाज के साथ मिलकर इस गीत का सामूहिक गायन करना चाहिए, ताकि यह परंपरा सदा जीवित रहे।”

इस तरह, वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का यह अवसर न केवल एक ऐतिहासिक पड़ाव है, बल्कि यह भारत की एकता, विविधता और राष्ट्रभक्ति की भावना का पुनः स्मरण कराने का भी प्रतीक बन गया है।

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