भारत की वायु रक्षा होगी मजबूत रूस से मिलेंगे अतिरिक्त S-400 मिसाइल, स्वदेशी तकनीक का बड़ा खुलासा

भारत की वायु सुरक्षा आने वाले दिनों में और अधिक मजबूत हो सकती है क्योंकि रूस ने भारतीय वायुसेना को दो से तीन अतिरिक्त एस 400 सिस्टम देने की इच्छा जताई है। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय एस 400 ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों को रोककर अपनी क्षमता साबित की थी। इसी सफलता के बाद रूस ने संकेत दिया है कि नई डील पर शुरुआती बातचीत शुरू हो चुकी है। रूस का दावा है कि इस बार डिलीवरी समय पर होगी और पिछली देरी दोबारा नहीं होगी।
पुरानी डील की देरी और नई शर्तें
भारत ने साल 2018 में पांच एस 400 रेजिमेंट खरीदने के लिए पांच दशमलव चार तीन बिलियन डॉलर की डील की थी। इनमें से तीन रेजिमेंट 2023 तक मिल चुकी हैं। लेकिन यूक्रेन युद्ध के कारण चौथी और पांचवीं रेजिमेंट की डिलीवरी आगे बढ़कर 2026 की शुरुआत और मध्य तक पहुंच गई है। भारत ने रूस को साफ कहा है कि नई डील तभी होगी जब डिलीवरी टाइमलाइन पूरी तरह तय और सुनिश्चित होगी। इस वजह से नई बातचीत बेहद सख्त मानकों पर हो रही है।

भारत की ढाल बन चुका है एस 400
भारतीय वायुसेना एस 400 को प्रतीक रूप में अपना सुदर्शन चक्र कहती है क्योंकि यह पाकिस्तान और चीन दोनों मोर्चों पर तैनात है और देश की बहु स्तरीय वायु रक्षा का मुख्य आधार है। ऑपरेशन सिंदूर में इसकी क्षमताएं दुनिया के सामने आ गईं। आदमपुर से तैनात एक यूनिट ने पाकिस्तानी विमान को तीन सौ चौदह किलोमीटर दूर से मार गिराया। वायुसेना प्रमुख ने पुष्टि की कि एस 400 ने छह पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को ध्वस्त किया। इसका बिग बर्ड रडार एक साथ तीन सौ से अधिक हवाई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और इसकी तैनाती का समय पांच मिनट से भी कम है।
नई डील में मेक इन इंडिया की बड़ी भूमिका
नई बातचीत का सबसे बड़ा पहलू यह है कि रूस पचास प्रतिशत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर देने को तैयार है। भारतीय कंपनियों जैसे बीडीएल को मिसाइल असेंबली में शामिल किया जाएगा। इसी के साथ अक्तूबर 2025 में मंजूर किए गए अड़तालीस एन छह मिसाइल के स्थानीय उत्पादन को तेजी दी जाएगी। एस 400 सपोर्ट सिस्टम का पचास प्रतिशत हिस्सा भारत में बनाया जा सकेगा जिससे लागत घटेगी और विदेशी निर्भरता कम होगी। इसे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
कब हो सकती है डील पक्की
नई डील पर बातचीत मध्य 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है। नए रेजिमेंट की डिलीवरी 2029 और 2030 के बीच शुरू हो सकती है। अनुमानित लागत तेईस बिलियन डॉलर बताई जा रही है। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने न केवल एस 400 की क्षमता साबित की है बल्कि भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग के एक नए रणनीतिक अध्याय की शुरुआत भी कर दी है। अगर यह डील फाइनल होती है तो भारत की हवाई सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी और पड़ोसी देशों से आने वाले किसी भी हवाई खतरे को रोकने की क्षमता अत्यधिक मजबूत हो जाएगी।