एस. जयशंकर और लावरोव का वर्चुअल सम्मेलन: खाड़ी क्षेत्र तनाव पर भारत-रूस की रणनीति

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव सोमवार को एक महत्वपूर्ण वर्चुअल सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इस सम्मेलन का उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अस्थिर परिस्थितियों से निपटने के तरीकों पर विचार-विमर्श करना है। दोनों पक्षों की बातचीत में इस क्षेत्र की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के उपाय शामिल होंगे। सम्मेलन का आयोजन मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास और अंतरराष्ट्रीय मामलों की रूसी परिषद (आरआइएसी) द्वारा किया जा रहा है।
खाड़ी संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय परिवहन मार्गों पर प्रभाव
सम्मेलन विशेष रूप से खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSCTC) पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया जा रहा है। यह गलियारा भारत, रूस और मध्य एशियाई देशों के बीच व्यापार और माल ढुलाई का महत्वपूर्ण मार्ग है। खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के चलते इस मार्ग पर आने वाली चुनौतियों और व्यापारिक अवरोधों पर गहन चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही दोनों देशों की नौवहन और व्यापार सुरक्षा रणनीतियों पर भी विचार किया जाएगा।

द्विपक्षीय सहयोग और वैश्विक रणनीतिक एजेंडा
सम्मेलन में भारत और रूस के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए रोडमैप तैयार करने की योजना है। एस. जयशंकर और सर्गेई लावरोव के साथ-साथ भारत के दो पूर्व राजदूत भी शामिल होंगे, जो वैश्विक स्तर पर तेजी से बदलती परिस्थितियों पर भारतीय दृष्टिकोण साझा करेंगे। इस मंच पर दोनों देशों के प्रतिनिधि द्विपक्षीय संबंधों की नई दिशा तय करने, निवेश और व्यापारिक अवसर बढ़ाने और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।
वैश्विक भूमिका और पश्चिम एशियाई परिदृश्य
सम्मेलन के प्लेनरी सत्र में रूस और भारत की बदलती वैश्विक व्यवस्था में भूमिका पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा एक सत्र में पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और क्षेत्रीय संघर्षों के संदर्भ में दोनों देशों के मित्र और भागीदारों की भूमिका पर भी चर्चा होने की संभावना है। यह सम्मेलन दोनों देशों के लिए रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान करेगा और खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में सहयोग बढ़ाएगा। वैश्विक हितों और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह बैठक द्विपक्षीय संबंधों में नई दिशा और नीति निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।