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हरियाणा में डॉक्टरों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा असर आज शाम को बैठक में करेंगे आगे का फैसला

हरियाणा में डॉक्टरों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा असर आज शाम को बैठक में करेंगे आगे का फैसला

Satyakhabarindia

 

Satya Kbahar,Panchkula

Doctors Strike in Haryana : हरियाणा में डायरेक्ट एसएमओ भर्ती सहित विभिन्न मांगों के समाधान न होने के कारण सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल आज दूसरे दिन भी जारी है। मंगलवार को कई सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के केबिन खाली नजर आए। हरियाणा में डायरेक्ट एसएमओ भर्ती सहित विभिन्न मांगों को लेकर डॉक्टर हड़ताल कर रहे है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो हड़ताल अनिश्चितकालीन हो सकती है। पंचकूला, सोनीपत और बहादुरगढ़ में सेवाएं प्रभावित रहीं, जबकि यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और कैथल में हालात सामान्य बताए गए। भिवानी और हिसार में अव्यवस्था की आशंका को देखते हुए धारा 163 का प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि, हिसार में डीसी के निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य बताया गया, यहां वैकल्पिक स्टाफ, मेडिकल कॉलेज और पीजी स्टूडेंट्स ओपीडी व इमरजेंसी चला रहे हैं।

 

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एसोसिएशन का दावा है कि राज्य के करीब तीन हजार डॉक्टरों ने दो दिन का सामूहिक अवकाश किया है जबकि राज्य सरकार के अनुसार डॉक्टरों की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है जिससे मरीजों को ज्यादा परेशानी नहीं आई।ओपीडी व इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं हैं। सरकार ने सख्त रवैया अपनाना भी शुरू कर दिया है। यमुनानगर में सीएमओ ने 66 डॉक्टर्स की छुट्टियां खारिज कर दी हैं। 16 डॉक्टरों को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है। ओपीडी चलाने के लिए मुलाना से 19 और ईएसआई अस्पताल से सात डॉक्टर को बुलाया गया है। नूंह जिले में भी हड़ताल का असर देखने को मिला, लेकिन जिला अस्पताल में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही।

 

मांडीखेड़ा अस्पताल में ओपीडी सामान्य दिनों की तरह चली और मरीजों को कोई विशेष परेशानी नहीं हुई। हड़ताल की सूचना जैसे ही प्रशासन को मिली, फिरोजपुर झिरका एसडीएम लक्ष्मी नारायण तुरंत निरीक्षण के लिए अस्पताल पहुंचे। उन्होंने विभिन्न वार्डों, ओपीडी काउंटर, दवा केंद्र और लैब सेवाओं का जायजा लिया। जींद में सबसे ज्यादा परेशानी हड्डी के रोगियों, मनोचिकित्सक, ईएनटी और ऑपरेशन को लेकर हुई। हड्डी, मनोचिकित्सक, ईएनटी के मरीजों को बिना उपचार के ही वापस जाना पड़ा, क्योंकि उन्हें देखने वाला कोई नहीं था। वहीं महिलाओं के लिए राहत ये रही कि महिला ओपीडी पहले की तरह ही सुचारू रूप से चली। सबसे ज्यादा ओपीडी महिलाओं की रही है।

मुख्यमंत्री बोले, जल्द निकलेगा हल

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एचसीएमएस डॉक्टरों द्वारा 48 घंटे के सामूहिक अवकाश पर जाने पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस मामले को लेकर सरकार गंभीर है। बातचीत जारी है और जल्द ही कोई हल निकल आएगा। नायब सिंह सैनी ने कहा कि डाक्टरों को भगवान की संज्ञा दी जाती है। यह मानवता की सेवा का पेशा है। इससे पहले भी डाक्टरों की कई मांगें सरकार द्वारा पूरी की गई हैं। वर्तमान में हमारे मंत्रीगण और अधिकारीगण उनसे बातचीत कर रहे हैं। उनकी सभी बातों को सुना जाएगा और किसी के अधिकारों का हनन नहीं होने दिया जाएगा।

सरकार से बातचीत की कॉल नहीं आई

एसोसिएशन के प्रधान डाॅ. राजेश ख्यालिया ने बताया कि नौ दिसंबर को भी हड़ताल जारी रहेगी। सरकार की ओर से बातचीत के लिए कोई कॉल नहीं आई है। उनका स्टैंड स्पष्ट है। आगे का फैसला बैठक में लिया जाएगा। उनकी मांग है कि सीएमओ की सीधी की भर्ती पर रोक लगाई जाए और एसीपी स्कीम को अपग्रेड कर लागू किया जाए। पिछले साल सरकार ने इन दोनों मांगों पर सहमति जता दी थी। अभी डायरेक्ट एसएमओ की भर्ती पर सहमति बनी है।

जो मांगें मान सकते थे, मान ली : स्वास्थ्य मंत्री

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स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने बताया कि हमने कई जगहों से डॉक्टर्स तैनात किए हैं। एनएचएम, मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों, डीएनबी विद्यार्थी और आयुष्मान विभाग के डॉक्टरों को ओपीडी की जिम्मेदारी दी है। सभी जगह ओपीडी या इमरजेंसी सर्विस चल रही हैं। सरकार ने उनकी कई मांगें मानी हैं, जो मान सकते थे, उनको मान लिया गया है। बाकी पर चर्चा हो रही है। जल्द ही डॉक्टरों से बात करेंगे। अगर नतीजे पर पहुंचते हैं तो बहुत जल्द हड़ताल खत्म हो जाएगी।

कहां फंसा है पेंच

राज्य के डॉक्टर वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों (एसएमओ) की सीधी भर्ती रोकने की मांग कर रहे हैं। पूर्व में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज इसकी मंजूरी दे चुके थे, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में इसे लागू नहीं किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और स्वास्थ्य सचिव सुधीर राजपाल के साथ हुई बैठकों में हालांकि सीधे एसएमओ की भर्ती नहीं किए जाने पर सहमति बन चुकी है, लेकिन एश्योर्ड करियर प्रमोशन (एसीपी) पर पेंच फंसा हुआ है।

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