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देश में प्राकृतिक चिकित्सा को उचित स्थान व सम्मान मिले – डा. शंकरानंद सरस्वती

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सत्यखबर सफीदों

देश में प्राकृतिक चिकित्सा को भी अन्य चिकित्सा प्रद्धतियों की तरह से उचित स्थान व मान-सम्मान मिलना चाहिए। यह बात अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. शंकरानंद सरस्वती ने कही। वे परिषद द्वारा योगा और प्राकृतिक चिकित्सा पर आयोजित ऑनलाईन कांफे्रस को संबोधित कर रहे थे। इस ऑनलाईन कांफ्रेस में देशभर से सैंकड़ों डाक्टर व विद्वान जुड़े हुए थे। डा. सरस्वती ने कहा कि विश्वभर में प्राकृतिक चिकित्सा व्यापक रूप से उभरकर सामने आई है लेकिन विडंबना यह है कि भारत में इस विद्या को जितना मान-सम्मान मिलना चाहिए था वह उसे आजतक नहीं मिल पाया है।

प्राकृतिक चिकित्सा को उसका उचित स्थान दिलाने के लिए अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद निरंतर प्रयासरत्त है। परिषद के प्रयासों का ही प्रतिफल है कि भारत सरकार में आयुष मंत्री ने योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड का गठन करके उसे नियमित करने की बात कही है। परिषद लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा में प्रशिक्षण देकर उन्हे शिक्षित करने का कार्य कर रही है और लाखों की संख्या में लोग प्रशिक्षित हो चुके है लेकिन विडंबना यह है कि अभी तक इन प्रशिक्षण प्राप्त लोगों का कोई डाटा नहीं है।

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परिषद ने यह निर्णय लिया है कि प्रशिक्षण प्राप्त इन लोगों का एक डाटा एकत्रित किया जाए, ताकि उसके अनुसार भविष्य की योजनाएं बनाई जा सकें और सरकार के सामने योजना ओं का एक प्रारूप रखा जा सके। उन्होंने कहा कि भारत में प्राख्चीनकाल से ही इलाज जड़ी-बुटियों व प्राकृतिक चिकित्सा से किया जाता रहा है। प्राकृतिक चिकित्सा पर लोगों का भरोसा आज भी कायम है। बड़ी तादाद में लोग चिकित्सा की अन्य पद्धतियों के मुकाबले आयुर्वेद को अपना रहे हैं। कोरोना महामारी में भी इस प्रद्धति का प्रयोग बीमारी के इलाज व बचाव के लिए किया जा रहा है।

सरकार द्वारा आयुर्वेद के हवाले से रोगप्रतिरोधरक क्षमता बढ़ाने के सुझाव दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा का क्षेत्र एक मिशन है जिसमें पूरी नैतिकता के साथ समर्पित होकर चिकित्सक समाज निर्माण में अहम योगदान कर सकते है। आम आदमी के जीवन में प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग का अहम महत्व है। कई देश इस चिकित्सा प्रणाली को अपना रहे हैं और इस दिशा में बहुत काम करने की जरूरत है। प्राकृतिक चिकित्सा आम लोगों के स्वस्थ जीवन जीने की पद्धति है।