यूपी में जातिगत राजनीति तेज, ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर शंकराचार्य का बड़ा दावा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातिगत समीकरणों को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बीजेपी के राजपूत विधायकों की बैठक के बाद अब ब्राह्मण विधायकों की अलग बैठक ने सियासी चर्चाओं को हवा दे दी है। लखनऊ में हुई इस बैठक को लेकर ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का तीखा बयान सामने आया है, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि पहले बीजेपी के राजपूत विधायकों ने अपने एजेंडे के तहत बैठक की और अब उसी की प्रतिक्रिया में ब्राह्मण विधायकों ने भी बैठक कर ली। उन्होंने सवाल उठाया कि इससे प्रदेश या देश का क्या भला होगा। शंकराचार्य ने कहा कि अब धीरे-धीरे बीजेपी के भीतर के “बुलबुले” बाहर आने लगे हैं और उत्तर प्रदेश में जातिवाद हावी होता दिखाई दे रहा है।
मंगलवार देर शाम लखनऊ में बीजेपी विधायक पीएन पाठक के सरकारी आवास पर आयोजित सहभोज कार्यक्रम में 40 से अधिक ब्राह्मण विधायकों ने हिस्सा लिया। सूत्रों के मुताबिक बैठक में ब्राह्मण समाज की स्थिति, संगठन में भागीदारी और भविष्य की रणनीति जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इस बैठक को मानसून सत्र के दौरान हुई राजपूत विधायकों की बैठक के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
इस घटनाक्रम के बाद बीजेपी के अंदर अंदरूनी खींचतान की अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह की जातिगत बैठकों का संदेश पार्टी के लिए शुभ नहीं है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए यह स्थिति एक नई चुनौती बन सकती है, क्योंकि असंतोष अगर खुलकर सामने आया तो इसका असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
मामले पर विपक्ष ने भी तुरंत हमला बोला है। समाजवादी पार्टी के महासचिव शिवपाल यादव ने इसे बीजेपी की जातिवादी राजनीति का नतीजा बताया और नाराज विधायकों को समाजवादी पार्टी के साथ आने का खुला न्योता दे दिया। उन्होंने कहा कि सपा में सभी को सम्मान मिलेगा और समाजवादी विचारधारा में जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता।
कुल मिलाकर ब्राह्मण और राजपूत विधायकों की अलग-अलग बैठकों ने यूपी की सियासत में नई बेचैनी पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में इसके और सियासी मायने निकल सकते हैं।