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हरियाणा में पंचकूला, सोनीपत और अंबाला नगर निगम के चुनावों पर लगी रोक

कांग्रेस विभिन्न मामलों को लेकर पहुंची थी हाईकोर्ट, हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद लगाया स्टे

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Stay on Local Body Election : पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रदेश के तीन नगर निगमों पंचकुला, अंबाला और सोनीपत में होने वाले चुनाव पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। आज कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई करने के बाद हाईकोर्ट ने यह आदेश पारित किया। इस चुनाव में हरियाणा चुनाव आयोग वीवीपीएटी मशीनों का प्रयोग नहीं करने वाला है और कांग्रेस का कहना था कि इन मशीनों के बिना चुनाव नहीं करवाया जा सकता।

कांग्रेस के रविंद्र रावल ने इस मामले को पहले भी उच्च न्यायालय में उठाया था लेकिन तब अदालत ने कहा था कि वह पहले निर्वाचन आयोग के कार्यालय जाएं अगर वहां से उन्हें राहत नहीं मिले तो उन्हें हाईकोर्ट आना चाहिए। रविंद्र रावल ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी जुटाना और उसके बाद निर्वाचन आयोग में अपनी शिकायत दर्ज करवाई थी। हरियाणा निर्वाचन आयोग ने इस मामले में कहा था कि उसके पास इस चुनाव के लिए इतनी वीवीपीएटी मशीन उपलब्ध नहीं है। तब रविंद्र रावल ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग से वीवीपीएटी मशीन लेने के लिए भी कहा था लेकिन हरियाणा निर्वाचन आयोग ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद रविंद्र रावल हाईकोर्ट पहुंचे थे। हाईकोर्ट में आज की सुनवाई के बाद न्यायालय ने तीनों नगर निगम के चुनावों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

बता दें कि पंचकूला में नगर निगम चुनावों से पहले वार्डबंदी को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस पार्टी ने सरकार द्वारा तय की गई नई वार्डबंदी के खिलाफ भी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में म्यूनिसिपल एक्ट-1994 के नियमों की अनदेखी करने और मनमाने ढंग से वार्डों के सीमांकन का गंभीर आरोप लगाया गया है।

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कांग्रेस रविंद्र रावल के अनुसार उन्हाेंने अपनी याचिका में कानूनी प्रावधानों को आधार बनाते हुए कहा कि नियमों के मुताबिक, किसी भी निगम क्षेत्र में वार्डबंदी में बदलाव तभी किया जा सकता है, जब निगम की सीमाओं में कोई नया क्षेत्र जोड़ा गया हो या घटाया गया हो। कांग्रेस का दावा है कि पंचकूला के मामले में ऐसा कोई बदलाव नहीं हुआ, फिर भी वार्डबंदी को बदल दिया गया।

कांग्रेस ने प्रशासन पर एससी की आबादी बढ़ने के बावजूद नई वार्डबंदी में एक एससी वार्ड कम करने का आरोप लगाया है। बिना वार्डों की संख्या घटाए या बढ़ाए एससी का एक वार्ड कम किए जाने का मुद्दा भी कांग्रेस ने अपनी याचिका में उठाया है।

कांग्रेस ने आपत्ति जताई है कि वैधानिक प्रावधानों के अनुसार वार्ड भौगोलिक रूप से सघन और आपस में सटे होने चाहिए, लेकिन वर्तमान वार्डबंदी में इसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। नियमों के तहत 10 प्रतिशत के अंतर के साथ जनसंख्या लगभग समान होनी चाहिए, लेकिन याचिका के अनुसार इसे भी दरकिनार कर दिया गया। कांग्रेस का कहना है कि प्रशासनिक सीमाओं और सार्वजनिक सुविधाओं को ध्यान में रखे बिना ‘तर्कहीन और खंडित’ वार्ड बनाए गए हैं।

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