हरियाणा के बच्चों के स्कूलों के बैग का वजन होगा कम
नियमों के विपरीत बैग का वजन ज्यादा मिलने पर होगी कार्रवाई

सत्य खबर हरियाणा
School Bag Weight : हरियाणा के स्कूलों में बच्चों के भारी बस्ते को लेकर लंबे समय से उठ रही आवाज अब असर दिखाने लगी है। जवाब दो हिसाब दो समूह की लगातार मुहिम के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने बड़ा कदम उठाते हुए 13 अप्रैल को शिक्षा विभाग को स्कूल बैग पॉलिसी 2020 तुरंत लागू करने के निर्देश दिए हैं। इससे प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है। शिक्षा विभाग के अनुसार स्कूल बैग का वजन ज्यादा पाए जाने पर स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
हिसार निवासी सामाजिक कार्यकर्ता सौरभ छाबड़ा के मुताबिक इस मुहिम की शुरुआत 18 दिसंबर 2025 को हुई थी। जवाब दो हिसाब दो समूह ने जिला शिक्षा अधिकारी के सामने बच्चों के बस्ते का मुद्दा उठाया था लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद समूह ने 28 जनवरी 2026 को आरटीआई के जरिए जानकारी जुटाई और इस जानकारी में आए तथ्यों के आधार पर समूह ने पूरा मामला शिक्षा विभाग और एनसीपीसीआर के सामने रखा था। इसके बाद आयोग ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए हरियाणा सरकार को जवाबदेही तय करने और पॉलिसी लागू करने के आदेश दिए हैं। इस अभियान में सौरभ छाबड़ा, राजीव सरदाना, ललित भाटिया समेत कई लोगों ने अहम भूमिका निभाई है। इनके समूह का कहना है कि यह बच्चों के अधिकारों की जीत है और अब वे सुनिश्चित करेंगे कि हर स्कूल में बस्ते का बोझ कम हो।
बता दें कि स्कूल बैग नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों के बस्ते का बोझ कम करना है। इसके तहत, बैग का वजन बच्चे के शरीर के वजन के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए। कक्षा 1-10 के लिए यह नियम अनिवार्य है, प्री-प्राइमरी में कोई बैग नहीं है और हर 10-15 दिनों में वजन की जांच करना आवश्यक है।
स्कूल बैग नीति 2020 के अनुसार कक्षा 1-2 में 1.6 किलोग्राम से 2.2 किलोग्राम निर्धारित किया गया है। कक्षा 3-5 के लिए 1.7 से 2.5 किग्रा, कक्षा 6-7 के लिए 2 से 3 किग्रा, कक्षा 8 के लिए 2.5 से 4 किग्रा, कक्षा 9-10 के लिए 2.5 से 4.5 किग्रा, कक्षा 11-12 के 3.5 से 5 किग्रा वजन निश्चित है।
प्राथमिक कक्षाओं के लिए केवल एक नोटबुक (कक्षा कार्य और होमवर्क के लिए)। भारी पाठ्यपुस्तकों को कम करने के लिए सेमेस्टर-वार पुस्तकों का वितरण तथा कक्षा 2 तक कोई होमवर्क नहीं और कक्षा 3-5 के लिए प्रति सप्ताह अधिकतम 2 घंटे का होमवर्क निर्धारित किया गया है।
नियमानुसार सभी स्कूलों में एक डिजिटल वेट मशीन होनी चाहिए ताकि नियमित रूप से बैग के वजन की जांच की जा सके। नीति में बैग की बनावट को लेकर कहा गया है कि बैग के पट्टे गद्देदार और चौड़े होने चाहिए ताकि वजन दोनों कंधों पर बराबर रहे।
यह नीति बच्चों के स्वास्थ्य (पीठ दर्द) को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, जो एनसीईआरटी के शोध पर आधारित है।
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