हरियाणा की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर पर महिला अधिकारी के यौन उत्पीड़न का आरोप
चैट भी आई सामने, जांच शुरू

सत्य खबर हरियाणा
Sports University of Haryana : प्रदेश की प्रतिष्ठित स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में एक महिला अधिकारी ने सहायक प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना और पेशेवर दुर्व्यवहार के संगीन आरोप लगाए हैं। स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के वीसी अशोक कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि शुक्रवार को उनके पास शिकायत आई और मामले में जांच करवाई जा रही है। कमेटी बनाई गई है और कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

महिला ने लिखित रूप में अपनी शिकायत दी और चैट भी शिकायत में लगाई गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वीसी कार्यालय ने तत्काल प्रभाव से कड़ा संज्ञान लिया है और प्रोफेसर के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस शिकायत को ‘आंतरिक शिकायत समिति’ (ICC) को भेजते हुए सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। घटना के बाद कैंपस के शैक्षणिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
प्रदेश के किसी विश्वविद्यालय में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों में इस प्रकार की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अभी पिछले दिनों जींद में प्रोफेसरों द्वारा छात्राओं के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था। उससे पहले मैं महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में महिला सफाई कर्मचारी का पीरियड चेक मामला भी सुर्खियों में रहा है। देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा भी इस प्रकार की घटनाओं को लेकर चर्चाओं में रहा।
क्या है शिकायत में
पीड़िता द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, उत्पीड़न का यह सिलसिला दिसंबर 2025 से शुरू हुआ था। खेल पत्रकारिता विभाग में तैनात सहायक प्रोफेसर डॉ. जयपाल ने पीड़िता को देर रात अनुचित मैसेज भेजे और बार-बार फोन कॉल किए।इन फोन कॉल्स के दौरान प्रोफेसर ने बेहद अनैतिक, अश्लील और यौन रूप से अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। जनवरी 2026 में भी आरोपी ने संपर्क साधने की बार-बार कोशिश की, जिससे महिला कर्मचारी को भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। महिला ने बताया कि खुद को बचाने के लिए उन्होंने आरोपी से दूरी बना ली थी और अपना कार्यक्षेत्र भी बदल लिया था, लेकिन आरोपी ने पीछा नहीं छोड़ा। आरोपी प्रोफेसर न केवल उनके निजी जीवन में हस्तक्षेप कर रहा था, बल्कि कार्यालय के अन्य सहकर्मियों के बीच पीड़िता की छवि और गरिमा को धूमिल करने के लिए झूठे बयान भी दे रहा था। इस व्यवहार के कारण कार्यस्थल पर एक भयभीत और शत्रुतापूर्ण वातावरण बन गया, जिससे महिला का अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना दूभर हो गया।
कुलपति ने क्या किया
मामले पर कुलपति के जारी कार्यालय आदेश के तहत, मामले को ‘यौन उत्पीड़न निवारण समिति’ को सौंप दिया गया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यह एक ‘तथ्य-खोज जांच’ (Fact-finding inquiry) होगी। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की बात सुनकर 7 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
पीड़िता की मांग और सुरक्षा के उपाय
महिला कर्मचारी ने अपनी लिखित शिकायत के साथ प्रासंगिक प्रमाण भी संलग्न किए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि जांच लंबित रहने तक आरोपी को उनसे सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क करने से रोका जाए। कैंपस में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और एक भयमुक्त वातावरण प्रदान किया जाए। दोषी पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
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