वंदे मातरम् पर ओवैसी के बयान से मचा तूफान, BJP ने दिया करारा जवाब

Tarun Chugh और Asaduddin Owaisi के बीच वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी बहस बन गया है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो लोग वंदे मातरम् का विरोध करते हैं वे बौद्धिक रूप से बेईमान हैं। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं बल्कि देश की स्वतंत्रता की लड़ाई का प्रतीक रहा है। तरुण चुग ने कहा कि पिछले 150 वर्षों से यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के दौरान हजारों क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम् का उद्घोष करते हुए अपनी जान तक न्योछावर कर दी थी। भाजपा नेता ने कहा कि आज भी हर भारतीय वंदे मातरम् गाते समय गर्व महसूस करता है और इसका सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
तरुण चुग ने ओवैसी के बयान को बताया हास्यास्पद
तरुण चुग ने कहा कि वंदे मातरम् का सम्मान केवल सरकारी आदेश नहीं बल्कि देश की जनता की भावना है। उन्होंने कहा कि यह गीत भारत की आत्मा से जुड़ा हुआ है और इसे लेकर विवाद खड़ा करना दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा नेता ने कहा कि जिन लोगों ने देश की आजादी के इतिहास को समझा है वे जानते हैं कि वंदे मातरम् किस तरह स्वतंत्रता आंदोलन का मंत्र बन गया था। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों ने फांसी के फंदे पर चढ़ते समय भी वंदे मातरम् का नारा लगाया था। चुग ने ओवैसी के बयान को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि राष्ट्रभक्ति और देश के सम्मान से जुड़े मुद्दों को धार्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई और कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया। भाजपा समर्थकों ने तरुण चुग के बयान का समर्थन किया जबकि विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।

ओवैसी ने वंदे मातरम् को लेकर क्या कहा
Asaduddin Owaisi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा था कि वंदे मातरम् एक देवी की स्तुति है और इसे राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि Jana Gana Mana भारत और उसके लोगों का उत्सव मनाता है जबकि वंदे मातरम् किसी एक धार्मिक विचारधारा से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। ओवैसी ने दावा किया कि वंदे मातरम् लिखने वाले Bankim Chandra Chattopadhyay मुसलमानों के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण रखते थे और ब्रिटिश शासन के प्रति सहानुभूति रखते थे। उन्होंने यह भी कहा कि Subhas Chandra Bose. Mahatma Gandhi. Jawaharlal Nehru और Rabindranath Tagore जैसे नेताओं ने भी इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया था। ओवैसी के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया है।
संविधान और भारत माता पर ओवैसी की दलील
ओवैसी ने अपने बयान में भारतीय संविधान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना “हम भारत के लोग” से शुरू होती है न कि “भारत माता” से। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को विचार अभिव्यक्ति विश्वास और धर्म की स्वतंत्रता देता है। ओवैसी ने दावा किया कि संविधान सभा में प्रस्तावना को देवी या भगवान के नाम से शुरू करने के सुझाव दिए गए थे लेकिन उन सभी प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया गया। उन्होंने कहा कि भारत किसी देवी देवता के नाम पर नहीं चलता बल्कि यहां के लोगों और लोकतांत्रिक मूल्यों से चलता है। उनके इस बयान के बाद देशभर में नई बहस छिड़ गई है। एक तरफ भाजपा इसे राष्ट्रभक्ति का मुद्दा बता रही है तो दूसरी ओर ओवैसी इसे संवैधानिक और वैचारिक बहस के रूप में पेश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और ज्यादा राजनीतिक रंग ले सकता है।