अंबाला नगर निगम मेयर के चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर
निर्दलीय उम्मीदवार मुकाबले को तिकोना बनाने में जुटी, कांग्रेस बीजेपी को भीतरघात का खतरा

सत्य खबर हरियाणा
Ambala municipal corporation election : करीब 2 लाख मतदाताओं वाले अंबाला नगर निगम के मेयर के चुनाव के लिए कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है। दोनों ही दलों के प्रत्याशी नए हैं लेकिन उनके परिवार राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले हैं। इस सीट पर वैसे तो सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच है लेकिन आजाद उम्मीदवार सोनिया मजबूत चुनौती दे सकती हैं।

इस सीट पर भाजपा ने युवक चेहरे के रूप में 32 वर्षीय अक्षिता सैनी को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने 60 वर्षीय कुलविंदर कौर को मैदान में उतारा है पूर्व में पार्षद रह चुकी 42 वर्षीय सोनिया रानी भी आजाद उम्मीदवार के रूप में मैदान में है। इस चुनाव में भाजपा की ओर से अंबाला शहर के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री असीम गोयल और कांग्रेस के वर्तमान विधायक निर्मल सिंह की प्रतिष्ठा दाव पर लगी हुई है। इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 1.98 लाख है, जिसमें महिला मतदाताओं की संख्या 95,550 और पुरुष मतदाता 1.02 लाख हैं।
अंबाला नगर निगम के मेयर की सीट पिछड़ा वर्ग बी श्रेणी की महिला के लिए आरक्षित थी और दोनों ही दलों ने सैनी समाज से टिकट देकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। हालांकि बीसी-बी श्रेणी में आरक्षण आने के कारण यह पहले से तय था कि यहां सैनी समाज की प्रत्याशी मैदान में होगी।
सैनी बनाम पंजाबी सैनी
भाजपा ने सैनी समाज से युवा चेहरे को मैदान में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने पंजाबी सैनी को मौका दिया है। भाजपा सैनी समाज और अपने कोर वोटर के माध्यम से इस चुनाव को जीतना चाहती है। वहीं कांग्रेस ने पंजाबी सैनी को उतारकर इस चुनाव में चुनौती दे दी है। अंबाला सिटी में पंजाबी समाज के लोगों की भी अच्छी तादाद है। यही कारण है कि नामांकन के दौरान भाजपा ने दिल्ली से मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को बुलाया था। उनकी पंजाबी समाज में अच्छी पकड़ है।
भीतरघात का डर
भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेताओं को भीतरघात का डर है। कांग्रेस में बने विभिन्न गुट सिटी विधायक निर्मल सिंह समर्थित प्रत्याशियों को कितना साथ देंगे यह चुनौती बन रहा है। इसके अलावा भाजपा से टिकट न मिलने पर भाजपा से करीब पांच नेता बागी होकर आजाद मैदान में हैं। वह भी नुकसान पहुंचाने का काम करेंगे।
भाजपा, कांग्रेस सभी को जिताया पर नहीं बना कोई काम
नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वर्षों से लोगों की शहर से जुड़ी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पा रही हैं। वार्डों में सड़कें खराब पड़ी हैं। जलभराव की समस्या से लोग हर साल जूझते हैं। इसके ऊपर प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी ने लोगों को बहुत रुलाया है। एडवोकेट गोपाल गुप्ता बताते हैं कि पिछले निगम के कार्यकाल में भाजपा की मेयर को मौका मिला, वार्ड सदस्यों की संख्या भी ठीक थी मगर गुटबाजी में काम नहीं होने दिए गए। भाजपा की महिला मेयर शैलजा सचदेवा खुद भी इसका विरोध कर रही थीं। अधिकारियों के खिलाफ लिख चुकी थीं मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं विधानसभा चुनाव में शहर के मतदाताओं ने कांग्रेस से विधायक बनाया था। इसके बावजूद शहर का विकास अटका हुआ है। ऐसे में दोनों पार्टियों के काम और उनके माननीयों को लोग देख चुके हैं।
शहर को उम्मीद देने का अवसर
बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रोहित जैन ने बताया कि अंबाला शहर में अधिकांश बड़ी परियोजनाएं अटकी हुई हैं। जलभराव की समस्या का वर्षों से समाधान नहीं मिला है। ऐसे में जो भी मेयर पद पर जीतेगा उससे लोगों को काफी उम्मीद होगी। इसके साथ ही नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार ने भी लोगों को काफी परेशान किया है। इसके समाधान के लिए कड़े फैसले लेने की आवश्यकता है। अगर यह कोई कर पाता है तो वही सफल हो सकेगा।
1. #HaryanaElections 2. #AmbalaMunicipalCorporation 3. #CongressVsBJP 4. #AmbalaMayorElection 5. #PoliticalShowdown 6. #HaryanaPolitics 7. #VoteForChange 8. #MunicipalElections2026 9. #BJPInAmbala 10. #CongressInAmbala 11. #Election2026 12. #HaryanaDemocracy 13. #AmbalaVotes 14. #CivicLeadership 15. #PoliticalBattle 16. #HaryanaVoters 17. #MayoralRace 18. #LocalGovernance 19. #AmbalaPoliticalScene 20. #HaryanaUnity