जींद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल हुआ पूरा
अंतिम ट्रायल रेलवे के CRS के सामने होगा और उसके बाद रेलवे मंत्रालय देगा संचालन की मंजूरी, अब हाइड्रोजन प्लांट करने लगा है ठीक तरीके से काम

सत्य खबर हरियाणा
Hydrogen Train : बहुप्रतीक्षित हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल का सिलसिला अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया। जींद से सोनीपत रूट पर पांचवां और अंतिम रनिंग ट्रायल सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। हाइड्रोजन ट्रेन का अंतिम परीक्षण रेलवे के सीआरएस के समक्ष किया जाएगा और उसके बाद इसको पटरी पर उतारने के लिए रेल मंत्रालय से स्वीकृति प्राप्त की जाएगी। अब हाइड्रोजन ट्रेन के नियमित संचालन की उम्मीदें बलवती हो गई हैं।
अपने अंतिम ट्रायल पर सुबह करीब 10:20 बजे ट्रेन जींद जंक्शन से रवाना हुई और लगभग पौने एक बजे सोनीपत जंक्शन पहुंची। वहां निर्धारित 15 मिनट के ठहराव के बाद ट्रेन वापसी के लिए रवाना हुई और करीब पौने चार बजे दोबारा जींद पहुंच गई। इस दौरान जींद-सोनीपत रेलखंड के प्रत्येक स्टेशन पर ट्रेन को एक से दो मिनट तक रोका गया, ताकि विभिन्न तकनीकी पहलुओं का परीक्षण किया जा सके।
पिछले दो सप्ताह में हाइड्रोजन ट्रेन के कुल पांच परफॉर्मेंस ट्रायल किए गए हैं। अब अंतिम सेफ्टी चेक बाकी है, जिसके बाद ट्रेन को ट्रैक पर उतारने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे पहले 16 से 20 मार्च के बीच तीन ट्रायल हुए थे, जिनमें 16 और 18 मार्च को दो-दो चक्कर लगाए गए, जबकि 20 मार्च को एक ही रन किया गया था।
बताया गया कि 16 मार्च के बाद प्लांट के इलेक्ट्रोलाइजर में आई खराबी के चलते ट्रायल प्रभावित हुआ था और बाहरी स्रोत से हाइड्रोजन गैस मंगवानी पड़ी थी। हालांकि अब तकनीकी खामी दूर कर ली गई है। गुरुवार को भी एक सफल ट्रायल किया गया था, जिसमें ट्रेन की अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई।
इस दौरान जींद से सोनीपत रूट पर हर स्टेशन पर ट्रेन को एक से मिनट तक रोक कर हाइड्रोजन गैस की खपत सहित अन्य तकनीकी चीजों की बारीकी से जांच की गई। हाइड्रोजन प्लांट से जुड़े अधिकारियों के अनुसार जब परफार्मेंस ट्रायल शुरू हुआ था, तब हाइड्रोजन ट्रेन में प्रति किलोमीटर 900 ग्राम गैस की खपत हो रही थी। तब प्लांट में तकनीकी कारणों से गैस का उत्पादन नहीं हो रहा था, इसलिए गैस बाहर से मंगवाई गई थी।
अब प्लांट में तकनीकी खामियां दूर होने के बाद गैस उत्पादन शुरू हो चुका है। प्लांट में तैयार हुई गैस से जो परफार्मेंस ट्रायल हुआ। उसमें प्रति किलोमीटर लगभग 800 ग्राम हाइड्रोजन गैस की खपत हुई। ऐसे में हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन खर्च डीजल इंजन के मुकाबले कम रहेगा। सीआरएस (कमिश्नर आफ रेलवे सेफ्टी) से स्वीकृति मिलने और अन्य तकनीकी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ट्रेन के उद्घाटन को लेकर समय निर्धारित होगा।
हाइड्रोजन प्लांट में इलेक्ट्रो फायर में गैस उत्पादन नहीं हो रहा था। इलेक्ट्रो फायर के लिए सेफ्टी वाल्व को जर्मनी से मंगवाया गया था। जर्मनी से सेफ्टी वाल्व आने के बाद इलेक्ट्रो फायर की तकनीकी खामी को दूर कर लिया गया है। जिसके बाद प्लांट में हाइड्रोजन गैस का उत्पादन शुरू हो गया है। प्लांट के प्रोजेक्ट हैड संजय शर्मा ने बताया कि प्लांट में अच्छी गुणवत्ता की गैस का उत्पादन हो रहा है। अच्छी गुणवत्ता की हाइड्रोजन गैस से माइलेज भी अच्छा मिल रहा है।
रेल अधिकारियों का मानना है कि सभी परीक्षण सफल रहने पर हाइड्रोजन ट्रेन जल्द ही यात्रियों के लिए शुरू की जा सकती है, जो पर्यावरण के लिहाज से एक बड़ा कदम साबित होगी।
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