पुरातत्व विभाग खोज रहा हड़प्पा संस्कृति क्यों हुई खत्म?

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

Heritage Village Rakhi-Garhi : ऐतिहासिक स्थल राखीगढ़ी में चौथे चरण की खुदाई में कई ऐसे पुरातात्विक अवशेष मिले हैं जिनसे उस समय यहां रहे लोगों की आभूषणों और खान-पान संबधी रुचि के बारे में पता चलता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम 22 जनवरी से टीला नंबर एक, दो और तीन पर खुदाई कर रही है। अब तक की खुदाई में हड़प्पा संस्कृति से जुड़ीं वस्तुएं मिलीं हैं। सबसे बड़ी टीम टीला नंबर दो पर परत दर परत खोदाई कर रही है। यहां मिले मनके कार्नियन (भूरे-लाल या नारंगी रंग का अर्ध-कीमती रत्न), सेलखड़ी और चर्ट जैसे पत्थरों के हिस्सों से अनुमान लगाया जा रहा है कि हड़प्पाकालीन लोग इन्हें आभूषणों के रूप में पहनते होंगे। टीले दो पर चूल्हा, खाना खाने की टेबल और मृदभांड के टुकड़े मिले हैं। इससे यह साबित होता है कि हजारों साल पहले भी हमारे बुजुर्ग खाना खाने के लिए मिट्टी की डायनिंग टेबल का प्रयोग करते थे। टीले के बाहरी किनारे पर खुदाई में ये अवशेष मिलने से पुरातत्वविद यह अनुमान लगा रहे हैं कि वो किनारों पर भी बसासत करके रहते थे।

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हजारों वर्ष पहले ही उन्होंने सुविधाओं से लैस ऐसी वस्तुओं की खोज कर ली थी जिनका प्रयोग आज हम कर रहे हैं। खुदाई में निकल रहे अवशेष ऐसे गवाह के रूप में सामने आ रहे हैं। जो कि हजारों साल पहले दफन हो गए थे। ये अपनी कहानी खुद बयां कर रहे हैं। टीला नंबर दो से कछुए और मछली के अवशेष मिले हैं। इससे प्रतीत होता है कि नदी में बहकर आए ये जीव यहां रहने वाले लोगों के खान-पान का हिस्सा रहे होंगे। सभी अवशेषों को संभालकर रखा गया है और खुदाई के बाद मिट्टी छानी जा रही है ताकि इन्हें अनुसंधान के लिए सहेज कर रखा जा सके। तीनों टीलों पर अलग-अलग टीमें खुदाई में जुटी हैं।

बड़ा सवाल क्यों खत्म हुई सभ्यता


ये सभ्यता क्यों खत्म हुई थी? इस बात का जवाब आज भी इन्हीं टीलों के नीचे दबा है। राखीगढ़ी में हो रही तीन टीलों की खुदाई से यह तस्वीर साफ होगी कि उस समय इस मेगा सिटी शहर का क्या स्वरूप था। टीला दो पर लगातार खुदाई से हर रोज इतिहास की परतें खुल रही हैं। कच्ची ईंटों की दीवार और चूल्हा इस बात के गवाह हैं। वो लोग यहां सुरक्षा के लिए रहते थे या किसी और कारण से इस अतीत को जानने के लिए अभी इंतजार करना होगा। हालांकि, जिस मकसद से खुदाई की जा रही है। शुरुआत में ही ऐसी चीजें मिलने से शहर का स्वरूप जल्द ही सामने आ जाएगा।

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वैदिक परंपरा के अनुयायी थे राखीगढ़ी के लोग


दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. शुभम केवलिया ने बताया कि पहले किए गए उत्खनन में यज्ञ वेदियां और घोड़े की मृण्मूर्ति प्राप्त हुई थीं। खुदाई में मिले कंकाल के डीएनए अध्ययन से पता चला कि यहां रहने वाले लोग भारत के मूल निवासी थे। इन अवशेषों से यह भी स्पष्ट होता है कि राखीगढ़ी के लोग वैदिक परंपरा के अनुयायी थे और आर्य आगमन के मिथक को चुनौती मिलती है।

11 टीलों में बंटा पुरातात्विक स्थल 500 हेक्टेयर से अधिक में फैला

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राखीगढ़ी हड़प्पाकालीन सभ्यता का सबसे बड़ा पुरातात्विक स्थल है। राखी शाहपुर और राखीखास के बीच 11 टीलों में बंटा यह पुरातात्विक स्थल 500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला है। वर्ष 1969 में प्रोफेसर सूरज भान की ओर से किए गए अन्वेषण से यह पता चला कि राखीगढ़ी के पुरातात्विक अवशेष और बस्तियां हड़प्पाकालीन संस्कृति के प्रतीक हैं।

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