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भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड देगा हरियाणा को 10000 क्यूसेक पानी

हरियाणा के किसानों को धान की रोपाई और उसके बाद सिंचाई में मिलेगी राहत

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

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A Big News For Haryana’s Farmers : एक बड़ी राहत भरी खबर है। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बी.बी.एम.बी.) ने धान सीजन के दौरान सिंचाई जरूरतों को देखते हुए पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के लिए पानी जारी करने को लेकर मंजूरी दे दी है। बी.बी.एम.बी. मुख्यालय चंडीगढ़ में चेयरमैन मनोज त्रिपाठी की अध्यक्षता में सांझेदार राज्यों की तकनीकी समिति (टी.सी.एम.) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्यों की जल मांग पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में पंजाब ने 25,000 क्यूसेक, हरियाणा ने 10,000 क्यूसेक और राजस्थान ने 12,500 क्यूसेक पानी की मांग रखी। राज्यों की मांग को मंजूरी देते हुए बी.बी.एम.बी. ने तय किया कि अगली तकनीकी समिति की बैठक तक इन्हीं मात्रा में पानी उपलब्ध करवाया जाएगा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार बी.बी.एम.बी. प्रबंधन इस बार भाखड़ा और पोंग दोनों बांधों से पानी छोड़ेगा लेकिन भाखड़ा डैम से अपेक्षाकृत अधिक और पोंग डैम से कम पानी छोड़े जाने की संभावना है। इसका उद्देश्य भाखड़ा जलाशय के जलस्तर को कुछ फीट कम करना है ताकि बर्फ पिघलने से आने वाले पानी और आगामी मानसून के दौरान होने वाले अतिरिक्त प्रवाह को संग्रहीत करने के लिए पर्याप्त जगह बनाई जा सके।

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस समय भाखड़ा के जलाशय का जलस्तर 1,578.07 फीट दर्ज किया गया है, जो इसके पूर्ण जलाशय स्तर (एफ. आर. एल.) 1680 फीट से लगभग 102 फीट कम है। वहीं, पोंग जलाशय का जलस्तर 1328.34 फीट है, जबकि इसका एफ.आर.एल. 1400 फीट है। पंजाब को बी.बी.एम.बी. प्रणाली के तहत 2 प्रमुख वितरण केंद्र रोपड़ और हरिके से पानी उपलब्ध करवाया जाता है। रोपड़ हैडवर्क्स पर पानी पंजाब और हरियाणा के बीच बांटा जाता है, जबकि हरिके बैराज से पंजाब और राजस्थान को पानी मिलता है। हरिके से छोड़े जाने वाले पानी में राजस्थान की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत अधिक रहती है। बी.बी.एम.बी. ने स्पष्ट किया है कि 30 जून 2026 को होने वाली अगली तकनीकी समिति की बैठक में जलाशयों की स्थिति, मानसूनी परिस्थितियों और राज्यों की जरूरतों की समीक्षा करने के बाद आगे की जल आपूर्ति पर निर्णय लिया जाएगा। धान रोपाई के महत्वपूर्ण दौर में यह फैसला तीनों राज्यों के किसानों के लिए फिलहाल राहत भरा है। क्योंकि बोर्ड ने तीनों ही राज्यों की मांग को पूरा करने का फैसला किया है। तीनों राज्य ने जितना पानी मांगा है फिलहाल बोर्ड ने तीनों को उसी के अनुरूप पानी देने का फैसला कर लिया है।

भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड के इस फैसले से हरियाणा के किसानों को काफी राहत होगी और उन्हें धान की रोपाई और उसके बाद पानी की समस्या कम होगी। हरियाणा में लगभग 31.25 लाख एकड़ (यानि लगभग 12.6 लाख हेक्टेयर) क्षेत्र में धान की खेती (रोपाई) की जाती है। राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 27% से 29% हिस्से में धान उगाया जाता है। प्रदेश के जिन जिलों में धान की फसल प्रमुख रूप से रोपाई की जाती है उनमें अंबाला, फतेहाबाद, जींद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, सोनीपत और यमुनानगर शामिल हैं।

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