दुनिया की सबसे लंबी और देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को चलने में अभी लगेगा समय, तीन से चार चरणों में होना है ट्रेन का ट्रायल
पटरियों के पास उगी झाड़ियां और पटरियों पर बैठते लोग भी बड़ी समस्या, अभी कम से कम एक महीना और लगेगा ट्रायल पूरा होने में

Satyakhabar, Jind
Neeraj Singla
Hydrogen Train : जींद से सोनीपत के बीच प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित दुनिया की सबसे लंबी और देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल तकनीकी परीक्षणों के चलते जनवरी में पूरा नहीं हो पाएगा। इस ट्रेन के लिए लोगों को अभी काम से कम एक महीना और इंतजार करना होगा। ट्रैक, ट्रेन और हाइड्रोजन प्लांट से जुड़े तकनीकी पहलुओं में आ रही जटिलताओं के कारण ट्रायल की समय-सीमा आगे बढ़ सकती है। पहले यह ट्रायल 25 जनवरी से पहले पूरा हो जाना था लेकिन अब इसमें एक महीने के करीब समय और लगने की उम्मीद है। ऐसे में अब हाइड्रोजन ट्रेन के फरवरी में ही ट्रैक पर दौड़ने की संभावना है।
पहले जनवरी के अंत तक ट्रायल शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन मौजूदा प्रगति को देखते हुए यह कार्य फरवरी में पूरा होने की संभावना बन रही है। दरअसल, हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन से पहले केवल ट्रैक की जांच ही नहीं, बल्कि ट्रेन की कार्यक्षमता, सुरक्षा मानकों और इंधन आपूर्ति प्रणाली की भी बारीकी से टेस्टिंग की जानी है। खास तौर पर हाइड्रोजन गैस के भंडारण और उपयोग को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। हाइड्रोजन गैस अत्यधिक संवेदनशील होती है और इसमें मौजूद नमी ट्रेन के इंजन व फ्यूल सेल सिस्टम को प्रभावित कर सकती है। इसी समस्या के समाधान के लिए हाइड्रोजन प्लांट में विशेष हीटर लगाए जाएंगे, ताकि गैस में मौजूद नमी को पूरी तरह सुखाया जा सके।

हाइड्रोजन ट्रेन 360 किलोग्राम हाइड्रोजन ईंधन में करीब 180 किलोमीटर का सफर तय करने में सक्षम होगी। जींद से सोनीपत की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है। ट्रेन की अधिकतम गति 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। संचालन से पहले सुरक्षा नियंत्रण उपकरण, स्पीड सेसर और कंट्रोल सिस्टम को अलग-अलग गति स्तरों पर परखा जाएगा, ताकि ट्रेन निधारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित रूप से संचालित हो सके। स्टेशनरी ट्रायल के बाद रनिंग ट्रायल किया जाएगा, जिसमें अभी कुछ और समय लग सकता है।
अभी सोनीपत ट्रैक और हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल होना बाकी है। इनकी टेस्टिंग को जाएगी। इन कायों में अभी समय लगेगा। नई दिल्ली स्थित रेलवे प्रबंधन के एसएसई बिजेंद्र कुमार का कहना है कि इस परियोजना में किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहता और न ही सुरक्षा से समझौता। इसी कारण सभी तकनीकी और सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के बाद ही हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल को अंतिम रूप दिया जाएगा।
इस ट्रेन के परीक्षण के लिए लखनऊ से विशेष तौर पर एक टीम आई हुई है जिसने यहां के हालातों का बारीकी से अध्ययन किया है। उन्होंने बताया कि ट्रैक के आसपास मौजूद झाड़ियों के कारण दृश्यता प्रभावित होती है, वहीं सुबह-शाम लोग पटरी पर बैठते हैं, मोबाइल पर बात करते हैं या पैदल आवागमन करते नजर आते हैं। 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से होने वाले ट्रायल के दौरान यह स्थिति गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। कर्मियों ने सुझाव दिया कि टेस्टिंग से पहले ट्रैक क्षेत्र की सफाई के साथ-साथ लोगों को जागरूक करना भी आवश्यक है। परीक्षण टीम के अधिकारियों ने इन सुझावों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि सुरक्षा सर्वोपरि है। टीम के एक सदस्य ने बताया कि ट्रैक के किनारे मौजूद झाड़ियों, अतिक्रमण और अनधिकृत गतिविधियों पर विस्तृत रिपोर्ट संबंधित विभाग को भेजी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाने के बाद ही ट्रायल प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके साथ ही टीम बैलास्ट की स्थिति, स्लीपरों की मजबूती और रेल पटरियों के अलाइनमेंट की भी जांच कर रही है, ताकि किसी भी तकनीकी खामी को समय रहते दूर किया जा सके।
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